नए साल की शुरुआत भारत और इजरायल के रिश्तों में नई ऊर्जा लेकर आई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से फोन पर बातचीत कर उन्हें और इजरायल की जनता को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने आने वाले समय में भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की।
वार्ता के केंद्र में क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा हालात रहे। दोनों प्रधानमंत्रियों ने आतंकवाद के खिलाफ साझा लड़ाई को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया और स्पष्ट किया कि इस चुनौती से निपटने के लिए भारत और इजरायल कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सुरक्षा और स्थिरता के मुद्दे पर दोनों देशों की सोच समान है और यही मजबूत साझेदारी की सबसे बड़ी नींव है।
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब पिछले कुछ महीनों से दोनों नेताओं के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। दिसंबर में भी प्रधानमंत्री मोदी और नेतन्याहू के बीच उच्चस्तरीय संवाद हुआ था, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग और पश्चिम एशिया की स्थिति, विशेषकर गाजा से जुड़े घटनाक्रमों पर चर्चा हुई थी। तब भी दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी की निरंतर प्रगति पर संतोष जताया था।
इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, नेतन्याहू की प्रस्तावित भारत यात्रा को दोबारा तय करने को लेकर भी बातचीत जारी है। यह यात्रा पहले दिसंबर में प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में स्थगित कर दी गई थी। माना जा रहा है कि यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों को और नई दिशा दे सकता है।
भारत में इजरायली दूतावास ने 2025 को भारत-इजरायल संबंधों के लिए उपलब्धियों भरा वर्ष बताया है। इस दौरान द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT), रक्षा सहयोग समझौते (MoU) और मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत के लिए ठोस आधार तैयार किया गया। इसके साथ ही भारत-इजरायल सीईओ फोरम और बिजनेस फोरम के माध्यम से तकनीक, कृषि, रक्षा, ऊर्जा और निवेश जैसे क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग को नई गति मिली है।
रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग लगातार गहरा हुआ है। 2025 में तेल अवीव में हुई भारत-इजरायल संयुक्त रक्षा कार्य समूह की 17वीं बैठक के दौरान अहम रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे सैन्य और सुरक्षा साझेदारी को मजबूती मिली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले समय में रक्षा, तकनीक, कृषि और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी है।
कुल मिलाकर, नए साल पर हुई यह बातचीत भारत और इजरायल के बीच गहराते रणनीतिक रिश्तों की पुष्टि करती है और यह संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी और अधिक मजबूत व बहुआयामी होने जा रही है।