जंबूरी विवाद पहुँचा हाईकोर्ट: पद से हटाने के फैसले को सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने दी संवैधानिक चुनौती

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छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित राष्ट्रीय रोवर–रेंजर जंबूरी अब केवल प्रशासनिक या संगठनात्मक मतभेद नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गंभीर संवैधानिक और कानूनी विवाद का रूप ले चुका है। आयोजन से जुड़े वित्तीय पहलुओं, स्थल परिवर्तन और अधिकारों की सीमा को लेकर उठा विवाद अब Chhattisgarh High Court की दहलीज तक पहुंच गया है। भाजपा सांसद Brijmohan Agrawal ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्वयं को स्काउट गाइड राज्य परिषद का वैध अध्यक्ष बताते हुए पद से हटाने की पूरी प्रक्रिया को असंवैधानिक करार दिया है।

इस पूरे विवाद की जड़ अधिकारों के टकराव में दिखाई देती है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता वाली परिषद ने पहले शिकायतों और कथित अनियमितताओं के आधार पर जंबूरी आयोजन को रद्द करने का निर्णय लिया था। परिषद का तर्क था कि आयोजन से जुड़े कई फैसले नियमों के विपरीत लिए गए और वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं बरती गई। हालांकि, राज्य स्काउट्स आयुक्त ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एवं आदिवासी रोवर–रेंजर जंबूरी का निर्णय पहले ही तय हो चुका था और उसे रद्द करने का अधिकार परिषद को नहीं था। यहीं से टकराव खुलकर सामने आ गया।

विवाद उस समय और गहरा गया जब आयोजन स्थल को बदलकर बालोद करने का फैसला सामने आया। आरोप है कि राज्य परिषद और कार्यकारिणी की सहमति के बिना स्कूल शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया, जिसे परिषद ने The Bharat Scouts and Guides के संविधान और निर्धारित प्रक्रियाओं का खुला उल्लंघन बताया। इसके साथ ही स्वीकृत बजट राशि को सीधे जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में ट्रांसफर किए जाने पर भी गंभीर आपत्ति जताई गई। परिषद का कहना है कि यह न सिर्फ नियमविरुद्ध है, बल्कि इससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका और मजबूत होती है। इन्हीं शिकायतों के आधार पर मामले में अपराध दर्ज हुआ और जांच शुरू की गई, जिसके बाद परिषद ने आयोजन पर रोक लगाने की मांग उठाई थी।

दूसरी ओर, स्काउट–गाइड संगठन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि आरोप भ्रामक और तथ्यहीन हैं तथा जंबूरी किसी भी परिस्थिति में स्थगित नहीं की जाएगी। संगठन ने यह भी रेखांकित किया कि यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय सहभागिता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। इसके बाद हरिभूमि टीम की ग्राउंड रिपोर्ट ने भी आयोजन स्थल पर तैयारियों को सामान्य और लगभग पूर्ण बताया, जिससे विवाद ने और राजनीतिक रंग पकड़ लिया।

इसी बीच सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए याचिका दायर की। उन्होंने अदालत में कहा कि उन्हें नियमों के विपरीत और बिना उचित प्रक्रिया के पद से हटाया गया, जो न केवल संगठन के संविधान बल्कि भारतीय संविधान की मूल भावना के भी खिलाफ है। उनकी याचिका ने इस विवाद को अब पूरी तरह कानूनी लड़ाई में बदल दिया है।

मामले पर मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai का बयान भी सामने आया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी तथ्य पहले ही रखे जा चुके हैं। उनके अनुसार यह आयोजन केंद्र सरकार से जुड़ा विषय है, जिसमें पूरे देश से स्काउट–गाइड्स शामिल होंगे और जंबूरी का आयोजन छत्तीसगढ़ में तय समय पर ही किया जाएगा।

अब यह विवाद केवल आयोजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह यह तय करेगा कि स्काउट–गाइड जैसे राष्ट्रीय संगठन में अधिकारों की सीमा, संवैधानिक प्रक्रिया और प्रशासनिक हस्तक्षेप की रेखा आखिर कहां खींची जाएगी। हाईकोर्ट का फैसला न सिर्फ जंबूरी के भविष्य को दिशा देगा, बल्कि संगठनात्मक स्वायत्तता को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल भी कायम कर सकता है।

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