रायपुर जिला अस्पताल की हेल्थ लैब ने रचा इतिहास: देश की पहली NQAS सर्टिफाइड IPHL बनी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने दी बधाई

Spread the love

छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रायपुर जिला अस्पताल में स्थित इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स यानी NQAS का प्रमाणन मिला है, जिससे यह देश की अपनी तरह की पहली लैब बन गई है जिसे यह मान्यता प्राप्त हुई। इस उपलब्धि को राज्य की गुणवत्ता-सुनिश्चित और भरोसेमंद डायग्नोस्टिक सेवाओं की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री J. P. Nadda को पत्र लिखकर जानकारी दी, जिसके बाद केंद्र स्तर से भी इस उपलब्धि की सराहना की गई।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने रायपुर की IPHL को राष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल बताते हुए कहा कि यह प्रमाणन राज्य में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की बढ़ती क्षमता और विश्वसनीयता को दर्शाता है। उनके अनुसार, इस पहल ने न सिर्फ जनविश्वास को मजबूत किया है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता के नए मानक भी स्थापित किए हैं। यह उपलब्धि बताती है कि सरकारी प्रयोगशालाएं भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रक्रियाओं और मानकों के अनुरूप सेवाएं दे सकती हैं।

NQAS दरअसल भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा तय किया गया ऐसा राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक है, जिसके जरिए यह परखा जाता है कि कोई अस्पताल या प्रयोगशाला कितनी सुरक्षित, सटीक, मरीज-केंद्रित और भरोसेमंद सेवाएं दे रही है। जब किसी IPHL को यह प्रमाणन मिलता है, तो इसका सीधा अर्थ होता है कि वहां सैंपल कलेक्शन से लेकर रिपोर्ट जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक, सुरक्षित और मानकीकृत है, और जांच परिणामों पर पूर्ण भरोसा किया जा सकता है।

रायपुर की इस लैब को NQAS मिलने का मतलब यह भी है कि यहां प्रशिक्षित और योग्य लैब टेक्नीशियन व विशेषज्ञ उपलब्ध हैं, आधुनिक और कैलिब्रेटेड उपकरणों का उपयोग हो रहा है और बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट व संक्रमण नियंत्रण के नियमों का सख्ती से पालन किया जाता है। इससे मरीजों की सुरक्षा, गोपनीयता और समयबद्ध सेवा सुनिश्चित होती है। यह प्रयोगशाला अब सिर्फ एक जांच केंद्र नहीं, बल्कि क्वालिटी-अश्योर्ड डायग्नोस्टिक सिस्टम के रूप में पहचानी जाएगी।

इस प्रमाणन का सीधा लाभ आम मरीजों को मिलेगा। जांच रिपोर्ट पर भरोसा बढ़ेगा, गलत रिपोर्ट या दोबारा टेस्ट की जरूरत कम होगी और सही इलाज समय पर शुरू हो सकेगा। इससे महंगी निजी लैब्स पर निर्भरता भी घटेगी। सिस्टम के स्तर पर यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सरकारी स्वास्थ्य ढांचा भी निजी क्षेत्र के बराबर, बल्कि कई मामलों में उससे बेहतर गुणवत्ता प्रदान कर सकता है। साथ ही, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन जैसे अभियानों की सफलता को भी बल मिलता है।

केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने रायपुर मॉडल को अन्य राज्यों के लिए बेस्ट प्रैक्टिस बताते हुए आग्रह किया कि इसी ढांचे पर अन्य जिलों में भी उच्च गुणवत्ता वाली डायग्नोस्टिक सेवाओं का विस्तार किया जाना चाहिए। वहीं मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जताते हुए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह राज्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण प्रयोगशाला और डायग्नोस्टिक सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ाया जाएगा।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सफलता वर्षों से किए जा रहे सतत सुधारों का परिणाम है, जिसमें लैब सेवाओं का मानकीकरण, गुणवत्ता आश्वासन, प्रशिक्षित मानव संसाधन, आधुनिक उपकरण और मजबूत अवसंरचना शामिल हैं। रायपुर की IPHL को मिला NQAS प्रमाणन न सिर्फ जिले, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक नई पहचान और भरोसे का प्रतीक बनकर उभरा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *