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टाटा स्टील चेस इंडिया में बड़ा विवाद: प्रागननंदा ने समय रहते घड़ी रोकी, मैच ड्रॉ; राउंड-4 में आनंद को झटका

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कोलकाता में जारी टाटा स्टील चेस इंडिया रैपिड के दूसरे दिन शतरंज प्रेमियों को एक ऐसा विवाद देखने को मिला, जिसने अर्बिटर के फैसलों पर नई बहस छेड़ दी। भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रागननंदा और अमेरिका के दिग्गज खिलाड़ी वेस्ली सो के बीच खेला गया मुकाबला निर्णायक के निर्णय के बाद ड्रॉ घोषित कर दिया गया, लेकिन यही फैसला अब सवालों के घेरे में है।

मैच के अंतिम क्षणों में प्रागननंदा जीत के बेहद करीब थे। उनका प्यादा प्रमोशन स्क्वायर तक पहुंच चुका था, लेकिन घड़ी में वक्त बेहद कम बचा था। जैसे ही क्लॉक में सिर्फ एक सेकेंड शेष रहा, प्रागननंदा ने बिना अगली चाल चले घड़ी रोक दी और अर्बिटर से मदद मांगी। लंबी चर्चा के बाद अर्बिटर्स ने मुकाबले को ड्रॉ करार दे दिया। दर्शकों और कमेंटेटर्स को उम्मीद थी कि समय खत्म होने के कारण वेस्ली सो को जीत मिल सकती है, लेकिन फैसला इसके उलट गया।

इस निर्णय की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई। मशहूर इंटरनेशनल चेस अर्बिटर क्रिस बर्ड ने सोशल मीडिया पर कहा कि नियम 6.11.2 के मुताबिक खिलाड़ी तभी घड़ी रोक सकता है, जब प्रमोशन पूरा हो चुका हो और जरूरी मोहरा उपलब्ध न हो। इस मामले में प्रमोशन हुआ ही नहीं था, इसलिए मैच को हार माना जाना चाहिए था। कई विशेषज्ञों का भी मानना है कि यह फैसला नियमों की भावना के खिलाफ है। हालांकि, वेस्ली सो ने खेल भावना दिखाते हुए कहा कि यह अनजाने में हुई स्थिति थी और वे बोर्ड पर खेलकर जीतना पसंद करते हैं, इसलिए उन्होंने जीत का दावा नहीं किया।

उधर, टूर्नामेंट के राउंड-4 में पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद को युवा भारतीय ग्रैंडमास्टर अर्जुन एरिगैसी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। आनंद मैच में मजबूत स्थिति में थे, लेकिन एक चूक ने अर्जुन को मौका दे दिया और उन्होंने मुकाबला पलटते हुए शानदार जीत दर्ज की। इसके बाद आनंद ने जबरदस्त वापसी की और लगातार जीत हासिल कर 4.5 अंकों के साथ संयुक्त बढ़त बना ली।

आनंद के साथ युवा सितारे निहाल सरिन भी 4.5 अंकों पर संयुक्त शीर्ष पर हैं। निहाल ने दिन के सभी मुकाबले जीतकर अपनी दावेदारी मजबूत कर ली। महिला वर्ग में रूस की कैटेरिना लाग्नो 4.5 अंकों के साथ आगे चल रही हैं, जबकि भारतीय खिलाड़ियों में वंतिका अग्रवाल, हरिका द्रोणावल्ली, आर. वैशाली और रक्षिता रवि अभी खिताबी दौड़ में बनी हुई हैं।

यह टूर्नामेंट अब सिर्फ चालों की लड़ाई नहीं, बल्कि नियमों और फैसलों की कसौटी भी बनता जा रहा है।

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