National Championship: राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप में बड़ा विवाद, खिलाड़ियों से खाली कराए गए होटल; कमरों के बाहर रखा मिला सामान

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ग्रेटर नोएडा में चल रही राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप उस वक्त विवादों में घिर गई, जब प्रतियोगिता के बीच ही कई राज्यों से आए मुक्केबाजों, कोचों और सपोर्ट स्टाफ को होटल खाली करने के लिए कह दिया गया। चैंपियनशिप अभी जारी है, इसके बावजूद गुरुवार और शुक्रवार को मुकाबले खत्म कर लौटे खिलाड़ियों को यह देखकर हैरानी हुई कि उनके कमरों का सामान पैक कर रिसेप्शन पर रख दिया गया है। होटल प्रबंधन की ओर से उन्हें बताया गया कि आगे के दिनों के लिए उनके नाम कोई बुकिंग नहीं है।

बताया जा रहा है कि आयोजनकर्ताओं की ओर से खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन टूर्नामेंट के शुरुआती दिन अव्यवस्थाओं के कारण हालात बिगड़ गए। पहले दिन रिंग समय पर तैयार न होने से मुकाबले देर से शुरू हुए और महिला वर्ग के 32 मुकाबलों को अगले दिन शिफ्ट करना पड़ा। इसी देरी और शेड्यूल में बदलाव के बीच होटल बुकिंग को लेकर यह बड़ा विवाद सामने आया।

पूरे घटनाक्रम पर भारतीय मुक्केबाजी महासंघ ने सफाई दी है। महासंघ का कहना है कि जैसे ही उन्हें होटल खाली कराए जाने की जानकारी मिली, तुरंत वैकल्पिक ठहरने की व्यवस्था की गई। ज्यादातर मुक्केबाजों को आयोजन स्थल गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी के परिसर में ठहराया गया है, जहां अच्छे इंतजाम किए गए हैं। बीएफआई ने दावा किया कि वह पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है ताकि आगे किसी खिलाड़ी को असुविधा न हो।

इसी विवाद के बीच रिंग में मुकाबले भी पूरे जोर-शोर से जारी हैं। दो बार की विश्व चैंपियन निकहत जरीन ने 51 किलो भार वर्ग में यूपी की कुसुम बघेल को 4-1 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। वहीं टोक्यो ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने 75 किलो वर्ग में यूपी की इमरोज खान को 5-0 से मात देकर खिताबी मुकाबले में जगह पक्की कर ली।

पुरुष वर्ग में भी मुकाबले रोमांचक रहे। जदुमणि सिंह ने अमित पंघाल को 5-0 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया, जहां उनका सामना उत्तराखंड के पवन बर्तवाल से होगा। पवन ने सेमीफाइनल में मणिपुर के विक्टर सिंह को 5-0 से पराजित किया।

कुल मिलाकर, जहां एक ओर राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप में खिलाड़ियों का प्रदर्शन चर्चा में है, वहीं दूसरी ओर ठहरने की अव्यवस्था ने आयोजन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि महासंघ आगे ऐसी स्थिति दोबारा न बनने देने के लिए क्या कदम उठाता है।

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