विधायक रिकेश सेन की एक और बड़ी पहल: अब 1 रुपये में डायलिसिस, 15 फरवरी से रोज़ 5 ज़रूरतमंदों को मिलेगा जीवनदान

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भिलाई नगर क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को आम लोगों तक पहुंचाने की दिशा में एक और अहम कदम उठाते हुए वैशाली नगर के विधायक Rakesh Sen ने 1 रुपये में डायलिसिस सेवा शुरू करने की घोषणा की है। मकर संक्रांति के मौके पर किए गए इस ऐलान के मुताबिक, 15 फरवरी—महाशिवरात्रि के दिन से यह सुविधा शुरू होगी। इसका सीधा लाभ उन निर्धन और मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा, जिनके लिए डायलिसिस का भारी खर्च इलाज को असंभव बना देता है।

शुरुआती चरण में यह सेवा विधायक कार्यालय, जीरो रोड शांति नगर से संचालित की जाएगी। प्रतिदिन अधिकतम पांच मरीजों को सूचीबद्ध कर निजी अस्पताल के साथ किए गए अनुबंध के आधार पर डायलिसिस कराया जाएगा। विधायक सेन ने बताया कि चयन पूरी तरह ज़रूरत और प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा, ताकि सबसे ज्यादा जरूरतमंद मरीजों तक लाभ पहुंचे।

डायलिसिस की महंगाई पर बात करते हुए विधायक ने कहा कि जब किडनी शरीर से विषैले तत्व, अतिरिक्त तरल और अपशिष्ट निकालने में असमर्थ हो जाती है, तब डायलिसिस जीवनरक्षक प्रक्रिया बन जाती है। निजी अस्पतालों में एक सत्र का खर्च आमतौर पर 3,000 से 4,000 रुपये तक होता है, जबकि महीने भर का खर्च 12,000 से 20,000 रुपये या उससे भी ज्यादा पहुंच जाता है। यही वजह है कि कई परिवार इलाज टालते रहते हैं या बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। इसी पीड़ा को देखते हुए 1 रुपये में डायलिसिस सेवा शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

रिकेश सेन ने यह भी बताया कि लगभग दो लाख की आबादी वाले वैशाली नगर क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को सरल और सुलभ बनाना उनकी प्राथमिकता रही है। इससे पहले फ्री ब्लड टेस्ट, 1 रुपये में एक्स-रे जैसी सेवाएं शुरू की जा चुकी हैं और अब डायलिसिस को भी उसी कड़ी में जोड़ा गया है। उनका मानना है कि बीमारी के साथ आर्थिक बोझ नहीं जुड़ना चाहिए।

खबर को स्वास्थ्य जागरूकता से जोड़ते हुए उन्होंने डायलिसिस के प्रमुख तरीकों की जानकारी भी दी। हीमोडायलिसिस में मशीन के जरिए रक्त को फिल्टर कर शरीर में वापस भेजा जाता है, जो आमतौर पर सप्ताह में दो से तीन बार और तीन से पांच घंटे तक चलता है। वहीं पेरिटोनियल डायलिसिस में पेट की झिल्ली का उपयोग कर विशेष घोल के जरिए रक्त की गंदगी को साफ किया जाता है। दोनों ही प्रक्रियाएं जीवनरक्षक हैं, लेकिन महंगी होने के कारण आम लोगों की पहुंच से बाहर मानी जाती हैं।

स्थानीय नागरिकों ने इस पहल को सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि “जीवन की डोर” बताया है। लोगों का कहना है कि 1 रुपये में डायलिसिस उन परिवारों के लिए संजीवनी है, जो महंगे इलाज के डर से अस्पताल का रुख ही नहीं कर पाते। उम्मीद जताई जा रही है कि यह पहल आगे चलकर पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक मॉडल हेल्थ इनिशिएटिव बन सकती है।

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