यूट्यूब शॉर्ट्स देखते-देखते वक्त कैसे फिसल जाता है, इसका अंदाजा ज्यादातर लोगों को तब होता है जब घड़ी एक घंटे आगे निकल चुकी होती है। इसी आदत पर लगाम लगाने के लिए अब YouTube ने एक नया और बेहद काम का फीचर पेश किया है, जिसे Shorts Feed Limit या शॉर्ट्स टाइमर कहा जा रहा है। इस फीचर के आने के बाद शॉर्ट्स पर बिता समय अब पूरी तरह यूजर के कंट्रोल में होगा, न कि अंतहीन स्क्रॉलिंग के भरोसे।
इस नए फीचर के जरिए यूजर्स अब खुद तय कर सकेंगे कि वे रोजाना कितनी देर तक यूट्यूब शॉर्ट्स देखना चाहते हैं। जैसे ही तय किया गया समय पूरा होगा, शॉर्ट्स फीड अपने आप रुक जाएगी और स्क्रीन पर एक रिमाइंडर दिखेगा। इसका सीधा मतलब है कि अब “बस एक आखिरी शॉर्ट” कहकर घंटों समय बर्बाद नहीं होगा। यूट्यूब का यह कदम खास तौर पर बढ़ते स्क्रीन टाइम, डिजिटल एडिक्शन और बच्चों के कंटेंट कंजम्पशन को कंट्रोल करने की जरूरत को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
दरअसल, शॉर्ट्स फीड लिमिट फीचर एक तरह का डिजिटल वेलबीइंग टूल है। अब तक शॉर्ट्स का सबसे बड़ा नुकसान यही माना जाता था कि इसमें स्क्रॉलिंग कभी खत्म नहीं होती। यूजर एक वीडियो के बाद दूसरा और फिर तीसरा देखते-देखते कब लंबा समय निकाल देता है, इसका एहसास ही नहीं होता। इसी अनलिमिटेड स्क्रॉलिंग को रोकने के लिए यह फीचर लाया गया है, ताकि यूजर अपनी दिनचर्या और स्क्रीन टाइम के बीच संतुलन बना सके।
इस सुविधा से खास तौर पर पैरेंट्स को भी राहत मिलेगी, क्योंकि वे बच्चों के लिए शॉर्ट्स देखने की एक तय सीमा सेट कर सकेंगे। इसके अलावा पढ़ाई, काम या नींद पर असर डालने वाली आदतों को कंट्रोल करने में भी यह फीचर मददगार साबित होगा। कुल मिलाकर यूट्यूब का यह नया अपडेट उन लोगों के लिए वरदान है, जो डिजिटल दुनिया में रहते हुए भी अपने समय की कीमत समझते हैं।
अब शॉर्ट्स देखने का फैसला आपकी उंगलियों की आदत नहीं, बल्कि आपके टाइमर से तय होगा। यूट्यूब का यह फीचर साफ संकेत देता है कि प्लेटफॉर्म अब सिर्फ कंटेंट दिखाने पर नहीं, बल्कि यूजर्स की सेहत और समय की अहमियत पर भी ध्यान दे रहा है।