India vs New Zealand 3rd ODI: इतिहास रचने की दहलीज पर कीवी टीम, निर्णायक मैच से पहले दोनों को सता रही एक ही चिंता

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इंदौर में होने वाला तीसरा और निर्णायक वनडे सिर्फ सीरीज का आखिरी मुकाबला नहीं, बल्कि इतिहास की कसौटी भी है। न्यूज़ीलैंड क्रिकेट टीम भारत में अब तक वनडे सीरीज नहीं जीत पाई है। 16 भारतीय दौरों में, जिनमें वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंट शामिल रहे, कीवी टीम कभी भी वनडे सीरीज अपने नाम नहीं कर सकी। तीन बार वे निर्णायक मैच तक जरूर पहुंचे, लेकिन हर बार फैसला भारत के पक्ष में गया। अब एक बार फिर वही मौका सामने है, फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार न्यूजीलैंड की टीम पहले से ज्यादा निडर और युवा नजर आ रही है।

पिछले सीजन भारत में टेस्ट सीरीज 3-0 से जीतकर इतिहास रच चुकी न्यूजीलैंड की नजर अब वनडे में भी वही कहानी दोहराने पर है। खास बात यह है कि मौजूदा स्क्वॉड काफी युवा है। टीम के आठ खिलाड़ी पहली बार भारत दौरे पर हैं, दो खिलाड़ियों ने इसी सीरीज में डेब्यू किया है और पांच ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने अब तक 10 से भी कम वनडे खेले हैं। इसके बावजूद टीम का आत्मविश्वास बता रहा है कि वे दबाव से घबराने वाले नहीं हैं।

दूसरी तरफ भारतीय क्रिकेट टीम के लिए यह मुकाबला साख की लड़ाई जैसा है। चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप की मौजूदा विजेता और पिछला वर्ल्ड कप उपविजेता होने के नाते भारत कागज पर ज्यादा मजबूत दिखता है। लेकिन भारतीय परिस्थितियों में दिन से रात के बीच पिच और ओस का मिजाज तेजी से बदलता है। एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि पिछले तीन साल से ज्यादा समय से भारत ने टॉस जीतकर कोई घरेलू वनडे नहीं गंवाया है। असली परीक्षा तब होगी, जब टीम टॉस हारे और परिस्थितियां उसके खिलाफ जाएं।

इस मैच में सबसे ज्यादा नजरें डैरिल मिचेल और कुलदीप यादव की टक्कर पर होंगी। पिछले मुकाबले में जब कुलदीप गेंदबाजी के लिए आए, तो मिचेल ने उन्हें खुलकर निशाना बनाया और रन चेज को एकतरफा बना दिया। आंकड़े बताते हैं कि मिचेल ने कुलदीप की गेंदों पर बेखौफ बल्लेबाजी की है। अब कुलदीप के सामने न सिर्फ वापसी की चुनौती है, बल्कि पूरे मैच की दिशा मोड़ने का मौका भी।

टीम चयन दोनों टीमों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। भारत में वॉशिंगटन सुंदर के चोटिल होने के बाद आयुष बदोनी को टीम में जोड़ा गया, लेकिन पिछले मैच में मौका नितीश कुमार रेड्डी को मिला। रेड्डी ने सीमित गेंदबाजी की, ऐसे में बदोनी के डेब्यू की उम्मीद बढ़ गई है, हालांकि इंदौर की छोटी बाउंड्री उनके लिए जोखिम भरी हो सकती है। वहीं अर्शदीप सिंह ने हाल में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन इस सीरीज में अब तक उन्हें मौका नहीं मिला है।

इंदौर का होल्कर स्टेडियम हमेशा से बल्लेबाजों का स्वर्ग रहा है। यही वह मैदान है जहां वीरेंद्र सहवाग ने 219 रन ठोके थे और भारत ने 418 का पहाड़ खड़ा किया था। हाल के मुकाबलों में भी यहां 399 और 385 जैसे बड़े स्कोर बने हैं। मौसम पूरी तरह क्रिकेट के अनुकूल है, ऐसे में फैंस को एक और हाई-स्कोरिंग, सांस रोक देने वाला मुकाबला देखने की पूरी उम्मीद है।

कुल मिलाकर, यह मैच भारत के लिए घरेलू दबदबे को कायम रखने का मौका है, तो न्यूजीलैंड के लिए भारत में पहली वनडे सीरीज जीत का सुनहरा अवसर। इंदौर की पिच, टॉस की भूमिका और कुछ अहम व्यक्तिगत मुकाबले तय करेंगे कि इतिहास बदलेगा या एक बार फिर भारत की बादशाहत कायम रहेगी।

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