सदी के महानायक अमिताभ बच्चन 83 की उम्र में भी उतने ही सक्रिय और प्रेरक हैं, जितने अपने करियर के शुरुआती दिनों में थे। फिर भी, इस मुकाम पर खड़े होकर उन्होंने एक ऐसी कसक साझा की है, जो हर सीखने वाले मन को छू जाती है। अपने हालिया ब्लॉग में बिग बी ने लिखा कि लंबे अनुभव और अनगिनत उपलब्धियों के बावजूद उन्हें इस बात का अफसोस है कि काम से जुड़ी कई बुनियादी और जरूरी बातें उन्होंने बहुत पहले नहीं सीखीं।
अमिताभ बच्चन के शब्दों में, हर दिन कुछ नया सिखाता है, लेकिन दुख इस बात का है कि जिन बातों को वर्षों पहले समझ लेना चाहिए था, वे अब समझ में आ रही हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आज जिन तकनीकों और तरीकों को सीखने की जरूरत है, वे तब मौजूद ही नहीं थे। समय के साथ सीखने की ऊर्जा और उत्साह कम हो जाता है—यही सबसे बड़ा सच है, जिसे उन्होंने बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया।
बिग बी ने आधुनिक दौर की रफ्तार पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आविष्कार और तकनीक इतनी तेजी से बदलते हैं कि जब तक कोई सीखना शुरू करता है, तब तक समय आगे निकल चुका होता है। इसी अनुभव से उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि आज के समय में बुनियादी समझ विकसित करना और फिर उस काम के लिए सबसे योग्य लोगों को जिम्मेदारी सौंप देना ही समझदारी है। अगर किसी काम में आप विशेषज्ञ नहीं हैं, तो उसे स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है—विशेषज्ञ चुनिए, काम सौंपिए और नतीजा पाइए।
अपने अनुभव साझा करते हुए अमिताभ बच्चन ने आउटसोर्सिंग की संस्कृति को आज के दौर की बड़ी राहत बताया। उन्होंने माना कि पहले के समय में अगर किसी को कोई काम नहीं आता था, तो या तो वह पछतावे में रहता था या काम अधूरा ही रह जाता था। आज हालात अलग हैं—सीखने और काम कराने के विकल्प ज्यादा हैं, बस उन्हें अपनाने की समझ चाहिए।
वर्क फ्रंट की बात करें तो बिग बी ने हाल ही में टीवी के सबसे लोकप्रिय क्विज़ शो कौन बनेगा करोड़पति के 17वें सीज़न की शूटिंग पूरी की है। फिल्मों में वे आख़िरी बार तमिल एक्शन ड्रामा वेट्टैयन में नजर आए, जिसमें उनके साथ रजनीकांत, मंजू वारियर, फहाद फासिल और राणा दग्गुबाती जैसे दिग्गज कलाकार थे। उम्र के इस पड़ाव पर भी सीखने की ललक और आत्ममंथन—यही अमिताभ बच्चन को सचमुच ‘महानायक’ बनाता है।