दुनिया भर में बढ़ते ट्रेड टकराव और अमेरिका की सख्त टैरिफ नीति की आशंका ने कमोडिटी बाजार की दिशा बदल दी है। अब तक सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना-चांदी के साथ-साथ औद्योगिक धातु तांबा भी तेजी के रडार पर आ गया है। 19 जनवरी 2026 को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय—दोनों बाजारों में तांबे की कीमतों में अचानक उछाल देखा गया, जिससे निवेशकों और इंडस्ट्री की नजरें इस धातु पर टिक गई हैं।
घरेलू बाजार में सोमवार को Multi Commodity Exchange (MCX) पर तांबे के भाव मजबूती के साथ कारोबार करते दिखे। सत्र के दौरान कीमतें करीब ₹1,298 प्रति किलो के आसपास रहीं, जो पिछली क्लोजिंग के मुकाबले खरीदारी के बढ़ते दबाव का साफ संकेत है। ट्रेडर्स के मुताबिक, हेजिंग और प्री-एम्प्टिव खरीदारी ने भावों को सपोर्ट दिया।
विदेशी बाजारों से भी तांबे को दमदार सहारा मिला। अमेरिकी एक्सचेंज COMEX पर तांबा करीब $5.89 प्रति पाउंड तक पहुंच गया। यह तेजी बताती है कि वैश्विक निवेशक संभावित सप्लाई-रिस्क और नीतिगत अनिश्चितताओं को लेकर पहले से ही पोजिशन बना रहे हैं।
इस हलचल की जड़ अमेरिका की संभावित टैरिफ नीति मानी जा रही है। बाजार में चर्चा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump कुछ रणनीतिक धातुओं पर भारी टैरिफ लगाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। तांबा भी इस सूची में शामिल होने की अटकल है। भले ही अभी कोई औपचारिक घोषणा न हुई हो, लेकिन इसी आशंका ने कंपनियों और निवेशकों को समय रहते स्टॉक और पोजिशनिंग बढ़ाने पर मजबूर कर दिया है।
टैरिफ लागू होने की स्थिति में आयात महंगा पड़ सकता है। इसी जोखिम से बचाव के लिए कई इंडस्ट्रियल सेक्टर की कंपनियां तांबे का स्टॉक पहले ही बढ़ा रही हैं, जिसका सीधा असर कीमतों पर दिख रहा है। ऊपर से, तांबे की मांग अब सिर्फ पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रही। बिजली के तार, इलेक्ट्रिक वाहन, रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स और एआई-आधारित डेटा सेंटर्स में इसका उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है—यही वजह है कि लंबी अवधि में तांबे की डिमांड मजबूत मानी जा रही है।
कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि ट्रेड वॉर और भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक बने रहते हैं, तो तांबा आने वाले महीनों में नए ऊपरी स्तर छू सकता है। ऐसे में यह धातु सोना-चांदी के साथ मिलकर बाजार का तीसरा मजबूत स्तंभ बन सकती है—जहां औद्योगिक मांग और नीतिगत जोखिम, दोनों मिलकर भावों को सहारा दे रहे हैं।