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नवाचार की नींव; अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से नई पीढ़ी को संवारता भिलाई इस्पात संयंत्र

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सेल– भिलाई इस्पात संयंत्र केवल इस्पात उत्पादन तक सीमित एक औद्योगिक प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि शिक्षा, नवाचार और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में भी दीर्घकालिक दृष्टि रखने वाला संस्थान है। इसी सोच के अनुरूप संयंत्र द्वारा संचालित सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विद्यार्थियों को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में सतत प्रयास किए जा रहे हैं। इस क्रम में सेक्टर-10 स्थित बीएसपी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में स्थापित अटल टिंकरिंग लैब नई पीढ़ी में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मक सोच और तकनीकी दक्षता विकसित करने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है।

नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन के अंतर्गत स्थापित यह अटल टिंकरिंग लैब सेल के अंतर्गत पहली लैब है, जिसका उद्घाटन 14 अक्टूबर 2019 को सेल के निदेशक (कार्मिक)  श्री अतुल श्रीवास्तव द्वारा किया गया था। पूर्णत: वातानुकूलित एवं आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित यह लैब विद्यार्थियों को पारंपरिक कक्षा-कक्ष शिक्षण से आगे बढ़कर हैंड्स-ऑन लर्निंग का अवसर प्रदान करती है, जहाँ वे स्वयं प्रयोग करके सीखते हैं और अपनी कल्पनाओं को व्यावहारिक रूप देते हैं।

लैब में 3-डी प्रिंटर, रोबोटिक्स किट, डी-आई-वाई किट, रास्पबेरी-पाई, आर्डुइनो यूएनओ एवं नैनो बोर्ड, माइक्रोकंट्रोलर, सेंसर, स्टेम लर्निंग किट और इंटरैक्टिव बोर्ड जैसी उन्नत आधुनिक संसाधन उपलब्ध हैं, जिसे विद्यार्थी सीखते है और काम करते है। एक समय में 40 से अधिक विद्यार्थी यहाँ प्रयोगात्मक गतिविधियों में भाग लेकर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एस्टेम) आधारित समस्याओं के समाधान खोजते हैं। यह व्यवस्था छात्रों में समस्या-समाधान, टीमवर्क और नवाचार की प्रवृत्ति को सशक्त रूप से विकसित कर रही है।

अटल टिंकरिंग लैब की गतिविधियाँ केवल विद्यालय तक सीमित नहीं हैं। बीएसपी सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-10 की अटल टिंकरिंग लैब प्रतिवर्ष दो विशेष कार्यशालाओं का आयोजन करती है, जो ग्रीष्मावकाश और शीतावकाश के दौरान आयोजित होती हैं। इन कार्यशालाओं में विज्ञान और तकनीक में रुचि रखने वाले किसी भी विद्यालय के विद्यार्थी भाग ले सकते हैं। इन सत्रों में छात्रों को रोबोटिक्स, 3-डी प्रिंटिंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) के साथ-साथ बुनियादी इलेक्ट्रॉनिक्स परियोजनाओं के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे उनमें प्रारंभिक स्तर पर ही तकनीकी आत्मविश्वास विकसित होता है।

डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग की दिशा में अटल टिंकरिंग लैब द्वारा एक यूट्यूब चैनल भी संचालित किया जा रहा है, जिसे विद्यालय के विद्यार्थी स्वयं प्रबंधित करते हैं। इस मंच पर छात्र अपनी परियोजनाओं, नवाचारों और प्रयोगात्मक गतिविधियों से जुड़े वीडियो साझा करते हैं, जिससे न केवल उनकी सीख को व्यापक पहचान मिलती है, बल्कि अन्य विद्यार्थियों को भी नवाचार के लिए प्रेरणा प्राप्त होती है।

अटल टिंकरिंग लैब के इंचार्ज एवं गणित शिक्षक श्री टी. के. साहू के अनुसार यह लैब सभी जिज्ञासु विद्यार्थियों के लिए खुला मंच है। किसी भी विद्यार्थी को प्रत्येक शनिवार अथवा शासकीय अवकाश के दिनों में यहाँ आकर नई तकनीकें सीखने और अपने प्रोजेक्ट्स पर कार्य करने का अवसर मिलता है। यह लचीलापन छात्रों को निरंतर सीखने और प्रयोग करते रहने के लिए प्रेरित करता है।

लैब से जुड़े विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का प्रभावी प्रदर्शन किया है। “मेक इन सिलिकॉन” जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में बीएसपी सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर-10 के कक्षा 11 के विद्यार्थियों आलौकिक चौधरी, अभिजय चौधरी एवं आमीन खान ने हेल्थ-केयर सेक्टर से संबंधित अपने नवाचार के माध्यम से आईआईटी के विद्यार्थियों को पीछे छोड़ते हुए द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया। यह उपलब्धि न केवल विद्यार्थियों की तकनीकी दक्षता का प्रमाण है, बल्कि भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे शैक्षणिक और नवाचार-अनुकूल वातावरण की सार्थकता को भी दर्शाती है।

समग्र रूप से अटल टिंकरिंग लैब भिलाई इस्पात संयंत्र की उस दूरदर्शी नीति का प्रतिबिंब है, जिसके अंतर्गत वह उत्पादन के साथ-साथ शिक्षा और नवाचार को भी समान महत्व देता है। यह पहल आज के विद्यार्थियों को केवल परीक्षा-उत्तीर्ण करने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें भविष्य का वैज्ञानिक, अभियंता और नवोन्मेषक बनने के लिए तैयार कर रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें।

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