तमिलनाडु विधानसभा के सत्र की शुरुआत पहले ही दिन तीखे राजनीतिक टकराव के साथ हुई। राज्यपाल आरएन रवि ने उद्घाटन भाषण दिए बिना सदन से वॉकआउट कर दिया, जिसके बाद सदन का माहौल गर्मा गया। राज्यपाल ने आरोप लगाया कि सदन में राष्ट्रगान का अपमान हुआ है, जबकि सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे परंपराओं का उल्लंघन बताया।
राज्यपाल का कहना था कि तमिल ताई वंदनम के बाद राष्ट्रगान बजाया जाना चाहिए था, लेकिन स्पीकर ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। इसी असहमति के चलते उन्होंने सदन छोड़ने का फैसला किया। राज्यपाल ने यह दावा भी किया कि जब वे अपनी बात रखना चाह रहे थे, तब बार-बार उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने अभिभाषण पढ़ने से इनकार कर दिया।
वॉकआउट के कुछ ही देर बाद राजभवन की ओर से एक विस्तृत बयान जारी किया गया, जिसमें सरकार द्वारा तैयार राज्यपाल अभिभाषण को “भ्रामक दावों से भरा” बताया गया। बयान में निवेश से जुड़े ₹12 लाख करोड़ रुपये के दावे पर सवाल उठाए गए और कहा गया कि कई समझौते सिर्फ कागजों तक सीमित हैं, जबकि राज्य की विदेशी निवेश रैंकिंग गिरने का भी उल्लेख किया गया। इसके साथ ही महिलाओं के खिलाफ अपराधों में बढ़ोतरी, POCSO मामलों में 55 फीसदी और यौन उत्पीड़न की घटनाओं में 33 फीसदी इजाफे का दावा करते हुए युवाओं में नशे और उससे जुड़ी आत्महत्याओं के मुद्दे उठाए गए, जिन्हें कथित तौर पर भाषण में नजरअंदाज किया गया था।
सरकार की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्यपाल के कदम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्होंने सदन की लगभग सौ साल पुरानी परंपराओं का अपमान किया है। स्टालिन ने साफ किया कि डीएमके सरकार की ओर से राज्यपाल का कोई अपमान नहीं किया गया और पूरे घटनाक्रम को अनावश्यक विवाद बताया।
राज्यपाल के वॉकआउट के बाद विधानसभा में सरकार ने तुरंत प्रस्ताव पेश किया, जिसे बहुमत से पारित कर दिया गया। इसके तहत सरकार द्वारा तैयार राज्यपाल अभिभाषण को सदन के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया गया। यह कदम सरकार की ओर से स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि कार्यवाही संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी।
यह भी उल्लेखनीय है कि यह पहला मौका नहीं है जब राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा में अभिभाषण नहीं दिया। वर्ष 2024 और 2025 में भी वे इसी तरह भाषण से परहेज कर चुके हैं और तब भी राष्ट्रगान को लेकर विवाद के बाद वॉकआउट हुआ था। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर राजभवन और राज्य सरकार के बीच जारी तनाव को सतह पर ला दिया है, जिससे आने वाले दिनों में सियासी बहस और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।