शिक्षक प्रशिक्षण की तस्वीर आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदलने जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत डिप्लोमा आधारित पाठ्यक्रमों के लिए अब कोई अलग जगह नहीं छोड़ी गई है और इसी कारण डीएलएड को 2030 तक क्रमशः बंद करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। नई व्यवस्था में छात्रों को पढ़ाई बीच में छोड़ने पर भी अर्जित वर्षों के आधार पर सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री मिलेगी। इसी ढांचे में एक साल की बीएड पढ़ाई पूरी करने पर डीएलएड की समकक्ष उपाधि दी जाएगी, जिससे डीएलएड को अलग पाठ्यक्रम के रूप में चलाने की जरूरत नहीं रहेगी।
प्रदेश में फिलहाल बीएड की करीब 14,600 और डीएलएड की लगभग 6,700 सीटें हैं। नई नीति लागू होने के साथ बीएड सीटें यथावत रहेंगी, जबकि डीएलएड की सीटें धीरे-धीरे घटती जाएंगी। शिक्षक बनने के लिए ये दोनों पाठ्यक्रम अब तक जरूरी रहे हैं, इसलिए हर साल इनकी सीटें भर जाती थीं। हाल के समय में डीएलएड की मांग इसलिए भी बढ़ी, क्योंकि Supreme Court of India ने पहली से पांचवीं कक्षा तक अध्यापन के लिए डीएलएड डिग्री को अनिवार्य बताया था। लेकिन नीति के बदलाव के बाद अब यह अनिवार्यता एकीकृत डिग्री मॉडल में समाहित हो जाएगी।
इसी बदलाव की कड़ी में प्लेन बीएड पर भी विराम लगता दिख रहा है। अब बीएड के स्थान पर बीएबीएड, बीएससीबीएड और बीकॉम बीएड जैसे इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा दिया जा रहा है। शिक्षक शिक्षा से जुड़ी मान्यता देने वाली संस्था National Council for Teacher Education ने बीते दो शैक्षणिक सत्रों में प्रदेश के किसी भी नए महाविद्यालय को प्लेन बीएड शुरू करने की अनुमति नहीं दी। पिछले सत्र में 23 कॉलेजों ने बीएड पाठ्यक्रम के लिए आवेदन किया था, लेकिन किसी को भी हरी झंडी नहीं मिली।
अगले सत्र के लिए भी एनसीटीई द्वारा आवेदन प्रक्रिया शुरू किए जाने की तैयारी है, लेकिन संकेत साफ हैं कि प्राथमिकता उन्हीं संस्थानों को मिलेगी जो इंटीग्रेटेड बीएबीएड, बीएससीबीएड या बीकॉम बीएड शुरू करना चाहते हैं। निजी बीएड कॉलेज संघ के संयोजक राजीव गुप्ता के मुताबिक डीएलएड को एक साथ बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा, क्योंकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में डिप्लोमा पाठ्यक्रमों का प्रावधान नहीं रखा गया है।
कुल मिलाकर, शिक्षक प्रशिक्षण अब अलग-अलग डिप्लोमा और डिग्री के बजाय एकीकृत और लचीले मॉडल की ओर बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में डीएलएड का नाम धीरे-धीरे इतिहास बन सकता है और शिक्षक बनने की राह बीएड के इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रमों से होकर गुजरेगी।