रायपुर साहित्य उत्सव 2026: ‘चाणक्य’ के मंचन से लेकर GEN-Z विमर्श तक, नवा रायपुर में तीन दिन बौद्धिक महाकुंभ

Spread the love

छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और बौद्धिक परंपरा को एक नई ऊंचाई देते हुए अटल नगर नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में रायपुर साहित्य उत्सव की भव्य शुरुआत हो चुकी है। 25 जनवरी तक चलने वाले इस तीन दिवसीय उत्सव ने पहले ही दिन यह संकेत दे दिया है कि यह आयोजन सिर्फ साहित्य का नहीं, बल्कि विचार, संस्कृति और संवाद का बड़ा मंच बनने जा रहा है। उद्घाटन समारोह में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।

इस साहित्य उत्सव में देश-प्रदेश से आए करीब 120 ख्यातिप्राप्त लेखक, कवि, विचारक, शिक्षाविद और रचनाकार हिस्सा ले रहे हैं। तीन दिनों में कुल 42 सत्र आयोजित होंगे, जिनमें समकालीन समाज, संस्कृति, राजनीति, पत्रकारिता, सिनेमा, डिजिटल युग और GEN-Z जैसे विषयों पर गहन विमर्श होगा। आज शाम 7 बजे उत्सव का सबसे चर्चित आकर्षण सामने आएगा, जब पद्मश्री से सम्मानित अभिनेता मनोज जोशी अपने बहुचर्चित एकल नाटक चाणक्य का मंचन करेंगे। सत्ता, नीति और नैतिकता पर आधारित यह नाटक हर वर्ग के दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है।

साहित्य उत्सव में रचनात्मकता के साथ-साथ युवाओं की खास भागीदारी भी देखने को मिल रही है। बुक स्टॉल्स पर हजारों किताबें सजी हैं, जहां GEN-Z और युवा पाठक अपनी पसंदीदा पुस्तकों के बीच समय बिताते नजर आएंगे। आयोजकों के मुताबिक अब तक 10,000 से ज्यादा साहित्य प्रेमी रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं और जो अब तक पंजीकरण नहीं कर पाए हैं, वे आयोजन स्थल पर भी यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

सत्रों में जिन प्रमुख साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों की उपस्थिति रहेगी, उनमें लेखिका-पत्रकार शिखा वार्ष्णेय, कवि कमलेश कमल, डॉ. गोपाल कमल और नवगीत के शिखर पुरुष डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र शामिल हैं। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के संचालक विकास दवे, ‘यू आर माई बेस्ट वाइफ’ के लेखक अजय के. पांडे, उपन्यासकार इंदिरा दांगी, लेखिका सोनाली मिश्र और हिंदी साहित्य की विदुषी जयश्री रॉय भी विभिन्न सत्रों में अपनी बात रखेंगे।

छत्तीसगढ़ी कविता और लोकसंस्कृति को विशेष स्थान दिया गया है। छत्तीसगढ़ी बोली के प्रमुख कवि रामेश्वर वैष्णव, रामेश्वर शर्मा, मीर अली मीर और शशि सुरेंद्र दुबे अपनी रचनाओं से मंच सजाएंगे, वहीं लोकगीत सत्र में डॉ. पी.सी. लाल यादव, शकुंतला तरार, बिहारीलाल साहू और डॉ. विनय कुमार पाठक प्रस्तुति देंगे। साहित्यिक मंडपों को भी प्रतिष्ठित साहित्यकारों के नाम दिए गए हैं। मुख्य मंडप ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित स्व. विनोद कुमार शुक्ल के नाम पर है, जबकि अन्य मंडप पं. श्यामलाल चतुर्वेदी, लाला जगदलपुरी और अनिरुद्ध नीरव के नाम से सजे हैं।

24 जनवरी को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में विशेष काव्य-पाठ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के चर्चित कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। इसके अलावा डिजिटल युग, एआई और साहित्य के संबंध पर भी खास सत्र होंगे, जिनमें ‘डिजिटल युग के लेखक और पाठक’ तथा ‘उपनिषद से एआई तक: साहित्य की यात्रा’ जैसे विषयों पर बौद्धिक चर्चा होगी।

पत्रकारिता, सिनेमा और टेलीविजन से जुड़े सत्रों में रुबिका लियाकत, अनुराग बसु और अन्य चर्चित नाम शामिल होंगे। साथ ही वर्धा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा, आईआईएम अहमदाबाद के निदेशक डॉ. भारत भास्कर, आईआईएमसी के पूर्व महानिदेशक डॉ. संजय द्विवेदी और राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी जैसे वक्ता भी विचार-मंथन का हिस्सा बनेंगे।

कुल मिलाकर रायपुर साहित्य उत्सव 2026 सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि विचारों का संगम बनकर उभर रहा है—जहां परंपरा और आधुनिकता, कविता और टेक्नोलॉजी, वरिष्ठ लेखक और GEN-Z एक ही मंच पर संवाद करते नजर आएंगे। यह उत्सव नवा रायपुर को देश के प्रमुख साहित्यिक केंद्रों की कतार में खड़ा करने की ओर एक मजबूत कदम माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *