US–Iran Tension: मिडिल ईस्ट की आसमान में सन्नाटा, युद्ध आशंका ने उड़ानों पर लगाया ब्रेक

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अमेरिका और ईरान के बीच तेज़ी से बिगड़ते रिश्तों ने मिडिल ईस्ट के हवाई यातायात को सीधे झकझोर दिया है। संभावित सैन्य टकराव की आशंका जैसे-जैसे गहराती जा रही है, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इजराइल, यूएई, सऊदी अरब और कतर के लिए उड़ानों पर अचानक ब्रेक लगा दिया है। यह स्थिति सिर्फ़ कुछ रूट्स की अस्थायी परेशानी नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का साफ़ संकेत बनकर उभरी है।

एविएशन नेटवर्क्स के अनुसार, यूरोप की प्रमुख एयरलाइंस ने हालात की गंभीरता को देखते हुए कई अहम फैसले लिए हैं। एयर फ्रांस और KLM ने तेल अवीव के साथ-साथ यूएई, सऊदी अरब और कतर के बड़े एयरपोर्ट्स के लिए उड़ानें रद्द कर दी हैं। KLM का कहना है कि इजराइल और खाड़ी देशों के लिए सभी रात की उड़ानें फिलहाल स्थगित की गई हैं और कंपनी लगातार सरकारी एजेंसियों से हालात की समीक्षा कर रही है। यह फैसला बताता है कि जोखिम सिर्फ़ ज़मीनी नहीं, बल्कि आसमान में भी तेजी से बढ़ रहा है।

जर्मनी की लुफ्थांसा ग्रुप ने भी सतर्क रुख अपनाते हुए इजराइल के लिए उड़ानों को केवल दिन के समय तक सीमित कर दिया है और ईरान व इराक के हवाई क्षेत्र से बचने का निर्णय आगे बढ़ा दिया है। वहीं उत्तरी अमेरिका की एयरलाइंस, जैसे यूनाइटेड एयरलाइंस और एयर कनाडा, ने भी तेल अवीव के लिए शुक्रवार और शनिवार की उड़ानें रद्द कर दीं। साफ है कि पश्चिमी देशों की एयरलाइंस किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं।

तनाव की इस श्रृंखला में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब ईरान ने संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका के चलते कुछ घंटों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। इस कदम से दुनियाभर की कई उड़ानों को या तो रद्द करना पड़ा या उनके रूट बदलने पड़े। भारतीय एयरलाइंस इंडिगो और एयर इंडिया ने भी पुष्टि की कि उनकी कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुई हैं। एविएशन सुरक्षा एजेंसियों की चेतावनी है कि मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों के दौर में नागरिक विमानों के लिए खतरा असामान्य रूप से बढ़ गया है।

यह हवाई अव्यवस्था ऐसे समय सामने आई है, जब अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने अतिरिक्त फाइटर जेट्स, युद्धपोत और हजारों सैनिक क्षेत्र में तैनात किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी एहतियाती बयान देते हुए कहा है कि एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा ईरान की दिशा में बढ़ रहा है। इस तरह के बयान और तैनातियां क्षेत्रीय तनाव को और हवा दे रही हैं।

दूसरी ओर, ईरान के भीतर भी हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई के बाद मौतों के आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों और ईरानी प्रशासन के आंकड़ों में भारी अंतर बताया जा रहा है। सूचना और इंटरनेट पर लगी पाबंदियों के चलते ज़मीनी सच्चाई की स्वतंत्र पुष्टि मुश्किल होती जा रही है, जिससे अनिश्चितता और डर का माहौल और गहराता है।

कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान तनाव अब सिर्फ़ कूटनीतिक या सैन्य बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहा। इसका असर सीधे आम लोगों की आवाजाही, वैश्विक एविएशन नेटवर्क और मिडिल ईस्ट की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ता दिख रहा है। आसमान में पसरा यह सन्नाटा बताता है कि हालात कितने नाज़ुक मोड़ पर खड़े हैं।

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