कृमिनाशक दवा पर फिर सवाल: एल-1 के बाद एल-2 कंपनी की एल्बेंडाजोल भी निकली अमानक

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रायपुर में शासकीय स्वास्थ्य केंद्रों में वितरित की जाने वाली कृमिनाशक एल्बेंडाजोल दवा की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पहले एल-1 कंपनी की दवा मानकों पर खरी नहीं उतरी थी और अब एल-2 कंपनी की सप्लाई की गई एल्बेंडाजोल में भी खोट सामने आई है। राज्य की दवा खरीदी एजेंसी CGMSC ने एहतियातन सख्त कदम उठाते हुए प्रभावित बैच को तत्काल स्वास्थ्य केंद्रों से वापस मंगाने का सर्कुलर जारी किया है।

जानकारी के मुताबिक, एल-1 कंपनी की दवा को लेकर पहले ही कई स्वास्थ्य केंद्रों से शिकायतें मिली थीं। संदेह के आधार पर कराई गई जांच में करीब चार बैच फेल पाए गए थे, जिसके बाद दवा की सप्लाई रोक दी गई और संबंधित कंपनी से अनुबंध समाप्त कर दिया गया। इसके बाद एल-2 कंपनी को एल्बेंडाजोल सप्लाई का आदेश दिया गया, लेकिन करीब आठ महीने बाद उसी दवा को लेकर भी शिकायतें सामने आने लगीं। हालात की गंभीरता को देखते हुए दवा निगम ने तुरंत रायपुर और बलौदाबाजार जिलों के स्वास्थ्य केंद्रों से एल-2 कंपनी की दवा वापस मंगाने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

पेट से कृमि हटाने में इस्तेमाल होने वाली इस दवा के सैंपल अब जांच के लिए भेजे गए हैं, ताकि गुणवत्ता से जुड़ी खामियों की पुष्टि हो सके। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों में एल्बेंडाजोल की अहम भूमिका रहती है और अगले माह फरवरी में प्रस्तावित फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में भी कुछ जिलों में इस दवा का डोज शामिल किया जाना था। ऐसे में बार-बार दवा के अमानक निकलने से न सिर्फ़ स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ी चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

इसी बीच, सीजीएमएससी ने स्थिति को संभालते हुए एल्बेंडाजोल की खरीदी के लिए नया टेंडर जारी कर दिया है और तीसरी कंपनी से दवा लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। लगातार दूसरी बार कृमिनाशक दवा के फेल होने की घटना ने दवा खरीदी और गुणवत्ता नियंत्रण की पूरी व्यवस्था पर गंभीर निगरानी की जरूरत को रेखांकित कर दिया है।

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