सनातन समाज के भीतर चल रही खींचतान पर योगगुरु Baba Ramdev का तीखा बयान सामने आया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सनातनी आपस में ही लड़ने में व्यस्त हैं, जबकि बाहर पहले से ही भारत-विरोधी और सनातन-विरोधी ताकतें सक्रिय हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब Swami Avimukteshwaranand माघ मेले से जुड़े विवादों के केंद्र में हैं। गोवा में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में रामदेव ने अपील की कि संतों को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होना चाहिए।
रामदेव ने कहा कि गौ-रक्षा केवल नारों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए ठोस प्रयास जरूरी हैं। उनके अनुसार, हर संत और आश्रम को हजारों गायों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पतंजलि पीठ पहले से ही एक लाख से अधिक गायों की देखभाल कर रहा है और शंकराचार्यों सहित सभी धार्मिक संस्थानों को इस दिशा में आगे आना चाहिए। उनका जोर इस बात पर था कि व्यवहारिक पहल ही सनातन मूल्यों की रक्षा कर सकती है।
अपने बयान में रामदेव ने यह भी कहा कि देश-विरोधी तत्व देश के नेतृत्व को नुकसान पहुंचाने के लिए हर तरह की कोशिशें कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे माहौल में संतों को राजनीतिक नेतृत्व के प्रति मन में नाराजगी नहीं रखनी चाहिए और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने Narendra Modi और Amit Shah का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को कमजोर करने वाली ताकतें उन्हें निशाना बना रही हैं।
इससे पहले Magh Mela Prayagraj में संगम स्नान के दौरान भी रामदेव ने विवाद पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने शंकराचार्य के साथ हुई बदसलूकी की निंदा करते हुए कहा था कि किसी भी साधु या संत के साथ अपमानजनक व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। रामदेव के मुताबिक, हर व्यक्ति को अपनी गरिमा का ध्यान रखना चाहिए और समाज को भी अपने पूज्य संतों के सम्मान के लिए सजग रहना होगा।
कुल मिलाकर, बाबा रामदेव का यह बयान केवल एक व्यक्ति या घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि सनातन समाज को आईना दिखाने वाला संदेश है—कि अंदरूनी टकराव छोड़कर साझा मूल्यों और राष्ट्रीय हित के लिए एकजुट होना समय की जरूरत है।