‘AI गॉडफादर’ का बड़ा फैसला: मेटा से इस्तीफा, LLM की अंधी दौड़ पर यान लेकन का तीखा वार

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में हलचल मच गई है। ‘AI गॉडफादर’ कहे जाने वाले Yann LeCun ने फेसबुक की पेरेंट कंपनी Meta Platforms को अलविदा कह दिया है। यह सिर्फ एक इस्तीफा नहीं, बल्कि सिलिकॉन वैली की मौजूदा AI सोच पर सीधा सवाल है। लेकन का कहना है कि टेक इंडस्ट्री ‘लार्ज लैंग्वेज मॉडल’ यानी LLM की अंधाधुंध दौड़ में फंस चुकी है, जो इनोवेशन को आगे बढ़ाने के बजाय उसे रोक रही है।

लेकन के मुताबिक आज सिलिकॉन वैली की लगभग सभी बड़ी कंपनियां एक ही दिशा में भाग रही हैं—बेहतर से बेहतर LLM बनाने की होड़ में। उन्होंने इस प्रवृत्ति को “LLM-pilled” बताया और कहा कि यह ऐसा है जैसे सब लोग एक ही गड्ढे को और गहरा खोद रहे हों, जबकि असली समाधान कहीं और तलाशने की जरूरत है। उनका आरोप है कि कंपनियां एक-दूसरे के इंजीनियरों को ऊंची सैलरी देकर सिर्फ इसलिए तोड़ रही हैं ताकि प्रतिद्वंद्वी कुछ नया न कर सकें। यही वजह है कि所谓 ‘AI टैलेंट वॉर’ असल में रिसर्च को आगे ले जाने के बजाय जकड़ रहा है।

लेकन का सबसे बड़ा तर्क सुपर-इंटेलिजेंस को लेकर है। उनका मानना है कि केवल भाषा पर आधारित मॉडल कभी भी वास्तविक बुद्धिमत्ता हासिल नहीं कर सकते। भविष्य की AI को “एजेंटिक सिस्टम” होना होगा—ऐसा सिस्टम जो खुद निर्णय ले सके, भविष्य के परिणामों का अनुमान लगा सके और दुनिया के नियमों को समझ सके। मौजूदा LLM शब्दों और वाक्यों की नकल तो कर लेते हैं, लेकिन भौतिक दुनिया, कारण-और-परिणाम और लंबे समय की योजना को समझने में कमजोर हैं। इसी कमी को लेकन ‘प्रेडिक्टिव वर्ल्ड मॉडल्स’ के जरिए भरना चाहते हैं।

मेटा से उनके अलग होने की कहानी भी इसी वैचारिक टकराव से जुड़ी है। जून 2025 में जब Mark Zuckerberg ने अरबों डॉलर के निवेश के साथ ‘Meta Superintelligence Labs’ की शुरुआत की और नेतृत्व Alexandr Wang को सौंपा, तो कंपनी का फोकस लगभग पूरी तरह LLM रेस पर सिमट गया। लेकन को लगा कि मेटा उस रास्ते से भटक रही है जो AI को सच में बुद्धिमान बनाने के लिए जरूरी था। नतीजा—उन्होंने इस्तीफा दिया और अब अपनी स्वतंत्र लैब शुरू करने का फैसला किया है, जहां फोकस ‘वर्ल्ड मॉडल्स’ और वास्तविक समझ पर होगा।

यान लेकन का यह कदम एआई रिसर्च के लिए एक चेतावनी भी है और एक संकेत भी। चेतावनी यह कि अगर पूरी इंडस्ट्री सिर्फ भाषा-आधारित मॉडलों में उलझी रही, तो इनोवेशन रुक सकता है। संकेत यह कि अगली बड़ी छलांग भाषा से आगे जाकर कारण-और-परिणाम, योजना और वास्तविक दुनिया की समझ से आएगी। उनके मुताबिक, अगर AI को मानव सभ्यता का सच्चा सहायक बनाना है, तो उसे शब्दों की सीमाओं से बाहर निकलना ही होगा।

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