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IAS-IPS-IFoS कैडर नीति 2026 में बड़ा बदलाव: चार ग्रुप सिस्टम लागू, मध्य प्रदेश दूसरे समूह में शामिल

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केंद्र सरकार ने अखिल भारतीय सेवाओं में अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक सुधार करते हुए Department of Personnel and Training (DoPT) के जरिए IAS, IPS और IFoS के लिए नई कैडर आवंटन नीति 2026 अधिसूचित कर दी है। यह व्यवस्था सिविल सेवा परीक्षा और भारतीय वन सेवा परीक्षा 2026 से लागू होगी। सरकार का तर्क साफ है—इस बदलाव से सेवाओं का अखिल भारतीय चरित्र और मजबूत होगा, राज्यों के बीच अफसरों के वितरण में संतुलन आएगा और कैडर आवंटन को लेकर वर्षों से चली आ रही असमानताएं खत्म होंगी।

इस नई नीति के साथ 2017 से लागू क्षेत्रीय प्रणाली को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। उसकी जगह अब चार समूहों पर आधारित नया मॉडल लागू किया गया है, जिसमें सभी राज्यों और संयुक्त कैडरों को वर्णानुक्रम के आधार पर बांटा गया है। इसका मकसद कैडर आवंटन को ज्यादा पारदर्शी, पूर्वानुमेय और निष्पक्ष बनाना बताया जा रहा है।

चार-ग्रुप मॉडल के तहत राज्यों का जो नया बंटवारा किया गया है, उसमें पहले समूह में AGMUT, आंध्र प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार और छत्तीसगढ़ को रखा गया है। दूसरे समूह में गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल और मध्य प्रदेश शामिल हैं। यानी साफ तौर पर कहा जाए तो MP अब ग्रुप-2 का हिस्सा होगा। तीसरे समूह में महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और तमिलनाडु आए हैं, जबकि चौथे समूह में तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल को रखा गया है।

नई नीति में कैडर रिक्तियों के निर्धारण के लिए सख्त समयसीमा भी तय की गई है। अब परीक्षा के अगले वर्ष की 1 जनवरी तक के कैडर अंतर के आधार पर रिक्तियां तय होंगी। राज्य सरकारों को 31 जनवरी तक अपनी रिक्तियों का प्रस्ताव भेजना अनिवार्य होगा और देर से आए प्रस्तावों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा। अंतिम परीक्षा परिणाम से पहले श्रेणीवार रिक्तियों का विवरण सार्वजनिक किया जाएगा, जिससे उम्मीदवारों को पहले से स्पष्ट तस्वीर मिल सके।

‘इनसाइडर’ यानी गृह राज्य कैडर चुनने वाले उम्मीदवारों के लिए नियमों को और कड़ा व स्पष्ट किया गया है। अब अभ्यर्थी को अपने गृह राज्य में सेवा देने की इच्छा साफ-साफ दर्ज करनी होगी। इनसाइडर आवंटन योग्यता आधारित रोटेशन के जरिए होगा, ताकि एक ही कैडर में टॉप रैंकर्स की भीड़ न लगे। अगर इनसाइडर रिक्तियां खाली रह जाती हैं, तो उन्हें उसी वर्ष आउटसाइडर रिक्तियों में बदल दिया जाएगा।

आउटसाइडर उम्मीदवारों के लिए कैडर आवंटन दो चरणों में होगा। दिव्यांग उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त रिक्तियां सृजित कर उनका समायोजन किया जा सकेगा। अन्य आउटसाइडर उम्मीदवारों का आवंटन चारों समूहों में तय रोटेशन चक्र के तहत किया जाएगा, ताकि लंबे समय में सभी राज्यों में संतुलन बना रहे।

EWS को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। नई नीति के मुताबिक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की रिक्तियों को अनारक्षित श्रेणी में ही माना जाएगा और कैडर रोस्टर में भी उसी तरह दर्शाया जाएगा। आरक्षण से जुड़ी किसी भी असमानता को दूर करने के लिए योग्य उम्मीदवारों को अनारक्षित रिक्तियों में समायोजित करने का प्रावधान भी रखा गया है।

एक और अहम बदलाव यह है कि अब Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration में प्रशिक्षण शुरू होने से पहले ही IAS अधिकारियों का कैडर अंतिम रूप ले लेगा। वहीं IPS और IFoS अधिकारियों का कैडर उनकी नियुक्ति के तुरंत बाद तय किया जाएगा।

सरकार को उम्मीद है कि यह नई कैडर नीति न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया को ज्यादा सुचारू बनाएगी, बल्कि युवा अधिकारियों को अलग-अलग राज्यों में काम करने का व्यापक अनुभव भी देगी। साथ ही, कैडर आवंटन को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवादों में अब ज्यादा निष्पक्षता और स्पष्टता देखने को मिलेगी।

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