राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लागू की गई दोहरी पुलिसिंग व्यवस्था अब प्रशासनिक उलझनों का कारण बनती दिख रही है। जिले और राजधानी की सुरक्षा को कसावट देने के इरादे से एक ओर पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू किया गया है, तो दूसरी ओर ग्रामीण पुलिसिंग के लिए अलग ढांचा खड़ा किया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि नई नियुक्तियों के बाद अफसरों के बैठने की व्यवस्था ही चरमरा गई है।
Raipur में फिलहाल ग्रामीण पुलिस के लिए अलग पुलिस लाइन की व्यवस्था नहीं हो पाई है। वहीं, Raipur Police Commissionerate में शामिल अफसरों के लिए भी पर्याप्त कार्यालय उपलब्ध नहीं हैं। हालात ऐसे हैं कि कई वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारी एक ही कार्यालय में बैठने को मजबूर हैं। कमिश्नरेट कार्यालय में इस वक्त सिर्फ पुलिस आयुक्त और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त के लिए ही स्थायी बैठकी व्यवस्था है, बाकी अफसरों के लिए जगह का इंतजाम अब तक नहीं हो सका है।
इस मुद्दे पर अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित तुकाराम कांबले का कहना है कि अफसरों की बैठक व्यवस्था को लेकर लगातार उपाय किए जा रहे हैं और सभी अधिकारियों को जल्द से जल्द अलग-अलग कार्यालय उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। फिलहाल कमिश्नरेट कार्यालय में आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त और क्लर्की कार्य के लिए सीमित व्यवस्था ही मौजूद है।
इधर, रायपुर ग्रामीण और शहरी थाना क्षेत्रों से जुड़े रिकॉर्ड की छंटाई का काम भी जारी है। जिला विशेष शाखा से रिकॉर्ड अलग किए जा रहे हैं, ताकि इसके बाद डीएसबी और ओएम शाखाएं सुचारु रूप से काम शुरू कर सकें। वरिष्ठ अफसरों ने निर्देश दिए हैं कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के पुलिस रिकॉर्ड की छंटाई जल्द पूरी की जाए।
पुलिस कमिश्नरेट में इस समय कुल 31 अधिकारी शामिल हैं। इनमें पुलिस आयुक्त, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, पांच डीसीपी, आठ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और 16 सहायक पुलिस आयुक्त शामिल हैं। इनमें से आधे से ज्यादा अफसरों को फिलहाल स्थायी ऑफिस नहीं मिल पाया है। खासकर राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी डीसीपी के कार्यालयों में अस्थायी तौर पर बैठकर काम चला रहे हैं।
अफसरों का कहना है कि पूरी व्यवस्था को पटरी पर आने में अभी एक पखवाड़े से ज्यादा का समय लग सकता है। जानकारी के मुताबिक रायपुर ग्रामीण के ज्यादातर अधिकारियों की बैठकी Nava Raipur की सीबीडी बिल्डिंग में की जा सकती है। वहीं क्राइम एएसपी के लिए भी नवा रायपुर में कार्यालय तय होने की बात सामने आई है।
मध्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सिविल लाइन, देवेंद्र नगर, तेलीबांधा, कोतवाली, गंज, मौदहापारा और गोलबाजार थाना क्षेत्रों के डीसीपी तथा क्राइम डीसीपी को सिविल लाइन स्थित सी-फोर बिल्डिंग में ऑफिस अलॉट किया गया है। सिविल लाइन थाना की पुरानी बिल्डिंग में स्थित क्राइम एएसपी संदीप मित्तल का कार्यालय अब क्राइम डीसीपी को सौंपा गया है। रायपुर पश्चिम के डीसीपी का दफ्तर आमानाका थाना परिसर में है, जबकि रायपुर उत्तर के डीसीपी के लिए अब तक कार्यालय तय नहीं हो पाया है।
कुल मिलाकर, राजधानी में दोहरी पुलिसिंग व्यवस्था का उद्देश्य भले ही कानून-व्यवस्था को मजबूत करना हो, लेकिन शुरुआती दौर में अफसरों की बैठकी और प्रशासनिक समन्वय बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है।