रायपुर से सामने आई यह खबर छत्तीसगढ़ की शिक्षा और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा मोड़ मानी जा रही है। अब प्रदेश के मजदूरों के बच्चे भी उन आवासीय स्कूलों में पढ़ाई कर सकेंगे, जहां अब तक पहुंच सिर्फ चुनिंदा वर्गों तक सीमित थी। छत्तीसगढ़ सरकार के श्रम विभाग द्वारा शुरू की गई अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत निर्माण श्रमिकों के बच्चों को सीबीएसई, आईसीएसई, छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड और यहां तक कि आईबी जैसे अंतरराष्ट्रीय बोर्ड से पढ़ाई का अवसर मिलेगा।
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बच्चों को न केवल नामी आवासीय स्कूलों में दाखिला मिलेगा, बल्कि पढ़ाई से जुड़ा हर खर्च भी पूरी तरह मुफ्त होगा। प्रवेश शुल्क, शैक्षणिक शुल्क, गणवेश, किताब-कॉपी, छात्रावास और भोजन तक का पूरा खर्च छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल द्वारा वहन किया जाएगा। इसका मकसद साफ है—मजदूर परिवारों के बच्चों को भी वही अवसर देना, जो अब तक समाज के संपन्न वर्ग को मिलते रहे हैं।
यह योजना खास तौर पर मंडल में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए बनाई गई है। पात्रता के अनुसार, किसी भी श्रमिक के पहले दो बच्चे ही इस योजना का लाभ ले सकेंगे, बशर्ते श्रमिक कम से कम एक वर्ष से मंडल में पंजीकृत हो। योजना का लाभ लेने वाले बच्चे मंडल की अन्य शिक्षा या छात्रवृत्ति योजनाओं के पात्र नहीं होंगे, लेकिन अगर वे बोर्ड परीक्षा में टॉप 10 में स्थान बनाते हैं, तो मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेघावी शिक्षा सहायता योजना के तहत प्रोत्साहन राशि पाने के हकदार होंगे। इसके अलावा 10वीं के बाद उच्च या व्यावसायिक शिक्षा के लिए भी उन्हें योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
शिक्षा की निरंतरता पर भी सरकार ने स्पष्ट शर्तें रखी हैं। बच्चों को कक्षा 6वीं में प्रवेश मिलेगा और इसके लिए तय न्यूनतम व अधिकतम आयु सीमा का पालन जरूरी होगा। साथ ही यह भी अनिवार्य है कि विद्यार्थी ने पिछले वर्ष छत्तीसगढ़ में संचालित किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय में नियमित पढ़ाई की हो। खास बात यह है कि यदि कोई बच्चा सैनिक स्कूल या नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में चयनित होता है, तो वह भी सीधे इस योजना के अंतर्गत लाभ लेने का पात्र होगा।
इस योजना के तहत बच्चों की पढ़ाई कक्षा 6वीं से लेकर 12वीं तक कराई जाएगी। आयु सीमा का निर्धारण राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुरूप किया गया है, जिसे 2024–25 सत्र से लागू करने के निर्देश पहले ही जारी हो चुके हैं। इसी ढांचे के तहत बच्चों का चयन किया जाएगा, ताकि शिक्षा में गुणवत्ता और समानता बनी रहे।
यदि आवेदकों की संख्या उपलब्ध सीटों से अधिक होती है, तो चयन के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा के जरिए बच्चों की योग्यता, ज्ञान और शैक्षणिक क्षमता का आकलन किया जाएगा और प्रदर्शन के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। साफ है कि सरकार इस योजना को केवल राहत नहीं, बल्कि प्रतिभा को अवसर देने के माध्यम के रूप में देख रही है।
कुल मिलाकर अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना सिर्फ एक सरकारी घोषणा नहीं, बल्कि मजदूर परिवारों के बच्चों के लिए वह सीढ़ी है, जो उन्हें साधारण हालात से निकालकर उत्कृष्ट और अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा तक पहुंचा सकती है। यह योजना छत्तीसगढ़ में सामाजिक बराबरी और शिक्षा के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में देखी जा रही है।