30 जनवरी को सोना-चांदी बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली और निवेशकों के लिए यह दिन बड़े झटके वाला साबित हुआ। रात 11:55 बजे कारोबार बंद होने तक मुनाफा वसूली के दबाव में MCX पर चांदी एक झटके में ₹1,06,092 टूट गई और 1 किलो चांदी का भाव ₹2,93,801 पर आ गया। महज एक दिन पहले यानी 29 जनवरी को चांदी ₹3,99,893 के रिकॉर्ड स्तर पर थी, इस तरह एक ही सत्र में करीब 26.53% की भारी गिरावट दर्ज हुई।
सोने में भी हालात अलग नहीं रहे। MCX पर 10 ग्राम सोना ₹20,323 (करीब 12%) टूटकर ₹1,49,080 पर आ गया, जबकि 29 जनवरी को यही सोना ₹1,69,403 पर कारोबार कर रहा था। इसके साथ ही गोल्ड और सिल्वर से जुड़े ETF में भी शुक्रवार को 23% तक की गिरावट देखी गई, जिसने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी।
फिजिकल बाजार यानी सर्राफा में भी दामों में तेज गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को चांदी ₹40,638 सस्ती हुई, जबकि सोने में ₹9,545 की गिरावट आई। India Bullion and Jewellers Association के मुताबिक, एक किलो चांदी का भाव घटकर ₹3,39,350 और 24 कैरेट 10 ग्राम सोने का रेट ₹1,65,795 पर आ गया।
इस तेज गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह हालिया रिकॉर्ड स्तरों के बाद हुई आक्रामक प्रॉफिट बुकिंग मानी जा रही है। ऊंचे दामों पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने मुनाफा सुरक्षित करना शुरू किया, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा। इसके साथ ही ऑल-टाइम हाई के बाद फिजिकल डिमांड कमजोर पड़ी और औद्योगिक उपयोग को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ी, जिसने कीमतों को नीचे खींचा।
MCX और सर्राफा बाजार के दामों में फर्क इसलिए दिखता है क्योंकि MCX एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है, जहां हर सेकंड बोली बदलती रहती है और कीमतें तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं। वहीं सर्राफा बाजार में फिजिकल सोना-चांदी की खरीद-फरोख्त होती है, जिसमें ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज और मेकिंग चार्ज जैसे खर्च जुड़ जाते हैं, इसलिए वहां रेट अलग नजर आते हैं।
ज्वेलरी खरीदते वक्त निवेशकों और ग्राहकों को सतर्क रहने की जरूरत है। हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड सोना ही लें और खरीद के दिन का रेट भरोसेमंद स्रोतों से क्रॉस-चेक करें। वहीं चांदी की शुद्धता पहचानने के लिए चुंबक से न चिपकना, बर्फ का तेजी से पिघलना, किसी तरह की गंध न होना और सफेद कपड़े पर रगड़ने पर काला निशान आना—ये सभी असली चांदी के संकेत माने जाते हैं।
कुल मिलाकर, रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद आई यह गिरावट बाजार की स्वाभाविक करेक्शन भी मानी जा रही है, लेकिन निवेशकों के लिए यह साफ संदेश है कि सोना-चांदी में तेजी जितनी तेज होती है, उतनी ही तेज गिरावट भी आ सकती है।