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स्थानीय व्यापार को नई उड़ान देता BNI मेला: 25 साल की परंपरा, आत्मनिर्भर भारत का जीवंत मॉडल

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जब स्थानीय व्यापार मजबूत होता है, तब केवल कारोबारी नहीं बल्कि पूरा शहर, जिला और राज्य आर्थिक रूप से सशक्त बनता है। इसी सोच को ज़मीन पर उतारता नजर आ रहा है BNI बिलासपुर द्वारा आयोजित व्यापार एवं उद्योग मेला 2026, जो साइंस कॉलेज मैदान, सरकंडा में पूरे भव्य स्वरूप के साथ चल रहा है। 25 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाता यह आयोजन अब सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, रोजगार, नवाचार और उद्यमिता का मजबूत मंच बन चुका है।

29 जनवरी से 3 फरवरी तक सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक चलने वाला यह मेला बीएनआई द्वारा आयोजित तीसरा व्यापार एवं उद्योग मेला है। निःशुल्क प्रवेश के कारण बिलासपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंच रहे हैं। छोटे दुकानदारों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई और बड़े उद्योगों को एक ही छत के नीचे जोड़ते हुए यह मेला स्थानीय व्यापारियों के आत्मविश्वास को नई मजबूती दे रहा है।

मेले के दूसरे दिन आयोजित मुख्य कार्यक्रम में तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष सतीश थौरानी, चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष भागचंद बजाज, पूर्व अध्यक्ष एवं संरक्षक श्रीचंद सुंदरानी, छत्तीसगढ़ सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष कमल सोनी सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही। अतिथियों ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन कर व्यापारियों से सीधा संवाद किया और आयोजन की सराहना करते हुए इसे छत्तीसगढ़ के आर्थिक भविष्य से जोड़ा।

महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर आयोजित विशेष कार्यक्रम “गांधी मजबूरी नहीं, मजबूती का नाम है” ने मेले को वैचारिक गहराई भी दी। इस अवसर पर आधारशिला ग्रुप के डायरेक्टर अजय श्रीवास्तव और डॉ. किरण पाल सिंह चावला ने गांधीजी के स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और नैतिक व्यापार के विचारों को आज के समय में प्रासंगिक बताते हुए अपने विचार रखे। कार्यक्रम में आधारशिला न्यू सैनिक स्कूल के विद्यार्थियों की उपस्थिति ने युवा पीढ़ी को भी इस विचारधारा से जोड़ा।

मेले की शुरुआत सद्भावना मैराथन से हुई, जिसमें नागरिकों ने सामाजिक एकता, भाईचारे और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का संदेश दिया। व्यापारिक दृष्टि से देखें तो यह मेला अपनी विविधता के लिए खास है। यहां घरेलू उत्पादों से लेकर भारी मशीनरी, जेसीबी, ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट, शिक्षा, हेल्थकेयर, फाइनेंस और टेक्नोलॉजी से जुड़े स्टॉल लगे हैं। वहीं 100 से अधिक फूड स्टॉलों पर व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिससे यह आयोजन एक पारिवारिक उत्सव का रूप ले चुका है।

व्यापारिक योगदान को सम्मान देते हुए छत्तीसगढ़ के 33 जिलों से आए 50 चयनित व्यापारियों को “छत्तीसगढ़ व्यापार रत्न” सम्मान से नवाजा गया। अतिथियों ने इस जनहितकारी और व्यापारोन्मुखी आयोजन के लिए बीएनआई परिवार को बधाई देते हुए इसे प्रदेश के लिए प्रेरणादायी बताया।

तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि यह मेला केवल व्यापार का मंच नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप्स और स्थानीय प्रतिभाओं को नई पहचान देने का माध्यम है। ऐसे आयोजन आत्मनिर्भर भारत की सोच को जमीनी स्तर पर मजबूत करते हैं और रोजगार के नए अवसर पैदा करते हैं। वहीं कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने कहा कि 25 वर्ष पहले हरिश केडिया द्वारा शुरू किया गया यह मेला आज नई ऊंचाइयों को छू रहा है और डॉ. किरण पाल सिंह चावला व बीएनआई परिवार के प्रयासों से आगे भी प्रगति करता रहेगा।

कुल मिलाकर, बीएनआई बिलासपुर व्यापार एवं उद्योग मेला आज छत्तीसगढ़ के व्यापारिक विकास का आईना बन चुका है, जहां छोटे, मध्यम और बड़े उद्योग एक साथ खड़े होकर यह संदेश दे रहे हैं कि स्थानीय शक्ति ही वैश्विक मजबूती की नींव है।

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