आम बजट 2026 जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, बाजार की धड़कनें किसी बड़े खर्चीले सरप्राइज से ज़्यादा नीति की निरंतरता, फिस्कल अनुशासन और ज़मीन पर उतरते सुधारों से जुड़ती दिख रही हैं। जानकारों का मानना है कि सरकार इस बार भी राजकोषीय संतुलन बिगाड़े बिना स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स और निजी निवेश को गति देने की रणनीति पर कायम रहेगी। बजट वाले दिन उतार-चढ़ाव संभव है, लेकिन मिड-टर्म में बाजार की दिशा कॉरपोरेट कमाई और लिक्विडिटी तय करेगी। इसी पृष्ठभूमि में कुछ सेक्टर बजट 2026 की कहानी के केंद्र में होंगे—जहां घोषणाओं से ज़्यादा अमल का महत्व रहेगा।
डिफेंस सेक्टर लंबे समय से सरकार की स्ट्रक्चरल प्राथमिकताओं में शामिल है। बीते वर्षों में इस सेक्टर ने मजबूत रिटर्न दिए, हालांकि हालिया वैल्यूएशन अपने पीक से 15–20 प्रतिशत नीचे आया है क्योंकि एग्जीक्यूशन पर बाजार की उम्मीदें सख़्त हुई हैं। एक्सपर्ट्स बड़े अपसाइड सरप्राइज की संभावना कम मानते हैं, लेकिन हालिया जियो-पॉलिटिकल घटनाक्रम और ऑपरेशन सिंदूर जैसे घटनाक्रमों ने रक्षा खर्च में निरंतर बढ़ोतरी की उम्मीद को फिर से मजबूत किया है। करीब 10 प्रतिशत बजट ग्रोथ की संभावना जताई जा रही है, जहां असली कसौटी समय पर डिलीवरी और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन होगी।
रेलवे में सरकार का एग्जीक्यूशन ट्रैक रिकॉर्ड खुद बोलता है। 2025-26 में 2.52 लाख करोड़ रुपये के कैपिटल अलोकेशन का 80 प्रतिशत से अधिक दिसंबर 2025 तक खर्च हो चुका था, जो मजबूत प्रगति का संकेत है। आगे की तस्वीर में रोड ओवर-ब्रिज और अंडर-ब्रिज, रोलिंग स्टॉक का विस्तार और नई ट्रेनों की शुरुआत शामिल है। बजट 2026 में ट्रैक अपग्रेड और सिग्नलिंग पर अतिरिक्त फोकस के साथ करीब 5 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे कुल खर्च लगभग 2.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इस थीम में RVNL, Ircon International और Jupiter Wagons जैसे नाम चर्चा में रह सकते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर सरकार का ग्रोथ इंजन बना हुआ है और इस बार भी नई घोषणाओं से ज़्यादा चल रहे प्रोजेक्ट्स को रफ्तार देने पर ज़ोर रहने की उम्मीद है। सड़कों, रेलवे, डिफेंस और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर पब्लिक कैपेक्स केंद्रित रहेगा। FY26 के लिए 11.2 लाख करोड़ रुपये के कुल कैपेक्स के साथ सड़क और रेलवे जैसे क्षेत्रों को पहले ही बड़ा समर्थन मिला है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के लिए सालाना 9–10 प्रतिशत बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है, साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए सेफ्टी बफर पर भी विचार हो सकता है। मजबूत ऑर्डर इनफ्लो से Larsen & Toubro, Siemens India, ABB India और BHEL जैसे खिलाड़ियों को सहारा मिल सकता है।
ऑटो सेक्टर में बजट से टैक्स राहत और जीएसटी सुधार की उम्मीदें डिमांड रिकवरी को सपोर्ट कर सकती हैं, खासकर टू-व्हीलर और मास-मार्केट सेगमेंट में। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब प्रयोग के दौर से आगे निकल चुकी है। पीएम ई-ड्राइव जैसी स्कीम्स, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त फंडिंग संभव मानी जा रही है, जिससे ईवी इकोसिस्टम को और मजबूती मिल सकती है।
सेमीकंडक्टर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स में फोकस अब घोषणाओं से हटकर तेज़ अमल पर शिफ्ट होता दिख रहा है। इंडस्ट्री अप्रूव्ड प्रोजेक्ट्स की तेज़ डिलीवरी, बेहतर टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन व डिज़ाइन-लिंक्ड इंसेंटिव जैसी स्कीम्स के निरंतर समर्थन की मांग कर रही है। भारत आज भी अधिकांश चिप्स इंपोर्ट करता है, ऐसे में घरेलू कंजम्प्शन इंसेंटिव, मैच्योर-नोड टेक्नोलॉजी के लिए फंडिंग और इंडियन-डिज़ाइन चिप्स को प्राथमिकता मिल सकती है। इस थीम में MosChip Technologies, Tata Elxsi और SPEL Semiconductor जैसे नाम लाभान्वित हो सकते हैं।
इन पांच सेक्टर्स के अलावा रियल एस्टेट में किफायती आवास को बढ़ावा देने, PMAY जैसी स्कीम्स को मजबूत करने और स्टांप ड्यूटी व टैक्स राहत जैसे कदमों की गुंजाइश दिखती है। केमिकल और फर्टिलाइज़र सेक्टर में टैक्स यूनिफॉर्मिटी, तेज़ ITC रिफंड और आसान लाइसेंसिंग पर फोकस संभव है। कुल मिलाकर बजट 2026 का संदेश साफ है—कम शोर, ज़्यादा काम; कम घोषणाएं, ज़्यादा अमल। बाजार भी इसी कसौटी पर बजट को परखेगा।