मंगलवार को विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने ऐसा दम दिखाया, जिसने निवेशकों का ध्यान खींच लिया। 3 फरवरी 2026 को डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 1.5% तक मजबूत हुआ—और यह उछाल पिछले 12 साल में बेहद कम मौकों पर देखने को मिला है। आंकड़ों के लिहाज से 2014 के बाद यह उन चुनिंदा दिनों में शामिल हो गया, जब रुपये ने इंट्राडे में इतनी तेज़ रफ्तार पकड़ी।
इस मजबूती के पीछे सबसे बड़ा ट्रिगर भारत-अमेरिका के बीच बनी ट्रेड डील रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लागू रेसिप्रोकल टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया। इस फैसले ने बाजार में तुरंत पॉजिटिव सेंटिमेंट पैदा किया और रुपये को मजबूत सहारा मिला।
दोपहर के कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 90.20 के स्तर तक पहुंच गया। यह बढ़त इतनी दमदार रही कि इसे 2014 के बाद तीसरी सबसे बड़ी इंट्राडे रैली माना जा रहा है। इससे पहले 18 दिसंबर 2018 को 1.62% और 11 नवंबर 2022 को 1.51% की तेजी दर्ज की गई थी। अब 3 फरवरी 2026 का उछाल भी उसी खास सूची में शामिल हो गया है।
ट्रेड डील के साथ-साथ एक और संकेत ने बाजार का भरोसा बढ़ाया—भारत का यह रुख कि वह रूस से तेल खरीद कम कर अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से आयात बढ़ा सकता है। इससे भारत-अमेरिका आर्थिक रिश्तों को लेकर निवेशकों की धारणा और मजबूत हुई। करंसी एक्सपर्ट्स का कहना है कि टैरिफ 18% तक लाना भारतीय निर्यातकों को पड़ोसी देशों की तुलना में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देता है, जिससे आगे चलकर एफपीआई फ्लो में भी सुधार दिख सकता है।
हालांकि जानकार यह भी आगाह कर रहे हैं कि रुपये की चाल एकतरफा नहीं होगी। भारतीय रिज़र्व बैंक की इंटरवेंशन पॉलिसी, एक्सपोर्टर्स की हेजिंग और ग्लोबल ट्रेंड्स मिलकर आगे की दिशा तय करेंगे। फिलहाल बाजार का अनुमान है कि रुपया 89 से 91 के दायरे में टिक सकता है।
कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका ट्रेड डील ने रुपये को मजबूत आधार दिया है और बाजार का मूड बदला है। आगे की चाल संतुलन और सतर्कता के साथ तय होगी—लेकिन फिलहाल, रुपये की यह रिकॉर्ड छलांग आर्थिक मोर्चे पर भरोसे का बड़ा संकेत बनकर उभरी है।