आज के समय में एक क्रेडिट कार्ड के बाद दूसरा लेना बहुत आसान हो गया है। कहीं ज्यादा कैशबैक का लालच, कहीं ट्रैवल और एयरपोर्ट लाउंज की सुविधा, तो कभी बैंक का प्री-अप्रूव्ड कॉल—ये सब मिलकर लोगों को एक से ज्यादा कार्ड रखने की ओर खींचते हैं। लेकिन असली सवाल कार्ड की गिनती का नहीं, बल्कि इस बात का है कि आप उन्हें कितनी समझदारी और अनुशासन के साथ इस्तेमाल करते हैं।
एक से ज्यादा क्रेडिट कार्ड रखने के अपने फायदे हैं। अलग-अलग कार्ड अलग तरह के खर्च पर ज्यादा फायदा देते हैं। कोई कार्ड ग्रॉसरी और फ्यूल पर बेहतर कैशबैक देता है, कोई ऑनलाइन शॉपिंग या ट्रैवल बुकिंग पर ज्यादा रिवॉर्ड्स देता है, तो प्रीमियम कार्ड होटल डिस्काउंट, लाउंज एक्सेस और बोनस पॉइंट्स जैसे फायदे जोड़ देते हैं। अगर सही प्लानिंग के साथ कार्ड इस्तेमाल किए जाएं, तो कुल मिलाकर फायदा काफी बढ़ सकता है।
क्रेडिट स्कोर के नजरिये से भी एक से ज्यादा कार्ड कई बार फायदेमंद साबित होते हैं। ज्यादा कार्ड होने से आपकी कुल क्रेडिट लिमिट बढ़ती है और अगर आप खर्च को लिमिट के मुकाबले कम रखते हैं, तो क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेश्यो घटता है। कम यूटिलाइजेशन को क्रेडिट स्कोर के लिए अच्छा माना जाता है। इसके अलावा, अगर किसी वजह से एक कार्ड ब्लॉक हो जाए या काम न करे, तो दूसरा कार्ड बैकअप के तौर पर काम आ जाता है।
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी उतना ही अहम है। कई कार्ड होने का मतलब है खर्च करने के ज्यादा मौके। अलग-अलग बिलिंग डेट और ड्यू डेट होने से गड़बड़ होना आसान हो जाता है। प्रीमियम कार्ड की सालाना फीस कई बार फायदा कम और बोझ ज्यादा बना देती है। सबसे बड़ा जोखिम एक भी भुगतान मिस होने का है, क्योंकि लेट पेमेंट का असर लंबे समय तक आपकी क्रेडिट रिपोर्ट पर बना रह सकता है। ऊपर से अगर कई कार्ड पर ईएमआई चल रही हों, तो मासिक कैश फ्लो पर भी दबाव पड़ता है।
वित्तीय विशेषज्ञ आमतौर पर मानते हैं कि ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए 1 से 3 क्रेडिट कार्ड काफी होते हैं। एक मुख्य कार्ड रोज़मर्रा के खर्च के लिए, एक बैकअप या किसी खास कैटेगरी के खर्च के लिए और जरूरत पड़े तो एक ट्रैवल कार्ड। लेकिन यह नियम सब पर लागू नहीं होता। अगर आपको बजट संभालने में दिक्कत होती है या समय पर पूरा बिल चुकाने की आदत नहीं है, तो एक कार्ड भी जोखिम बन सकता है।
आखिर में सच्चाई यही है कि क्रेडिट कार्ड सिर्फ एक वित्तीय टूल है। फायदा या नुकसान इस बात पर निर्भर करता है कि आप उसे कैसे इस्तेमाल करते हैं। कार्ड की संख्या से ज्यादा जरूरी है आपकी फाइनेंशियल डिसिप्लिन।