यह रिपोर्ट किसी एक अपराध की नहीं, बल्कि उस तंत्र की तस्वीर है जहाँ रोज़गार का लालच, डर की धमकियाँ और प्रभाव का दबाव मिलकर वर्षों तक एक नाबालिग की आवाज़ दबाए रखते हैं। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में दर्ज शिकायत के अनुसार, पीड़िता का शोषण 2018 से 2025 तक अलग-अलग स्थानों पर हुआ—जिनमें सरकारी रेस्ट हाउस, कार्यालय और होटल शामिल बताए गए हैं। मामला महिला थाने में दर्ज है और जांच जारी है।
पीड़िता के बयान के मुताबिक, शुरुआत उसकी मां को काम दिलाने के आश्वासन से हुई। मां-बेटी को सरकारी क्वार्टर में ठहराया गया और मां के काम पर जाने के दौरान कथित तौर पर पहली बार अपराध हुआ। आरोप है कि शुरुआती घटनाओं के बाद धमकियों के जरिए चुप्पी थोप दी गई। लॉकडाउन के दौरान परिवार शहर छोड़कर गया, लेकिन बाद में लौटने पर कथित शोषण का सिलसिला फिर शुरू हुआ।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि 2023 के बाद नौकरी के नाम पर दबाव बढ़ा, संपर्कों का प्रभाव दिखाया गया और सोशल मीडिया के जरिए डराया गया। अलग-अलग मौकों पर रेस्ट हाउस और होटलों में बुलाकर अपराध किए जाने के आरोप हैं। 2024-25 में भी ऐसी घटनाएँ बताए जाने के साथ यह आरोप जोड़ा गया है कि “आख़िरी बार” मिलने का झांसा देकर भी शोषण किया गया।
मामले में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें पीडब्ल्यूडी से जुड़े एक सेवानिवृत्त कर्मचारी, कुछ कारोबारी और एक प्रभावशाली व्यक्ति शामिल बताए गए हैं। एक राजनीतिक कनेक्शन का भी उल्लेख शिकायत में है; हालांकि संबंधित जनप्रतिनिधि ने उस व्यक्ति के अपने निजी सहायक होने से इनकार किया है और कहा है कि वह विभागीय अटैचमेंट में कार्यरत था।
पीड़िता के अनुसार, जब उसकी शादी तय हुई तब भी कथित तौर पर दबाव और बाधाएँ डाली गईं। अंततः उसने अपने मंगेतर को पूरी बात बताई, जिसके बाद हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की जा रही है। अब तक तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की सूचना है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। टीमें अलग-अलग राज्यों में दबिश दे रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, सभी आरोपों की तथ्यात्मक जांच कर कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला केवल एक पीड़िता की लड़ाई नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जहाँ प्रभाव और भय के सहारे अपराध लंबे समय तक छिपा रह सकता है। सच सामने आने के बाद अब निगाहें जांच की निष्पक्षता और न्याय की गति पर टिकी हैं।