देशभर के छात्रों के लिए आज एक बार फिर खास सुबह है। नरेंद्र मोदी आज ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें एडिशन के दूसरे एपिसोड में छात्रों से रूबरू होंगे। यह एपिसोड सुबह 10 बजे टेलिकास्ट किया जाएगा, जहां परीक्षा, तनाव, आत्मविश्वास और भविष्य के सपनों पर खुलकर बात होगी।
इससे पहले 6 फरवरी को आए पहले एपिसोड में प्रधानमंत्री ने दिल्ली स्थित पीएम आवास पर छात्रों से अनौपचारिक माहौल में संवाद किया था। असम का गमछा पहने पीएम मोदी ने बच्चों की कविताएं सुनीं, उनके सवालों के जवाब दिए और स्वदेशी अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने छात्रों से कहा था कि वे अगले 25 सालों में विकसित भारत बनाने को अपना सपना बनाएं और उसी दिशा में खुद को तैयार करें।
पहले एपिसोड में पीएम मोदी की बातों ने खासा असर छोड़ा। उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि डर को हराने की सबसे बड़ी ताकत आत्मविश्वास है। प्रेजेंटेशन या मंच पर घबराहट जैसे सवालों पर उन्होंने कहा था कि सच के साथ खड़ा इंसान बिना अभ्यास के भी आत्मविश्वास से बोल पाता है। गेमिंग में रुचि रखने वाले छात्रों को देश की अमर कहानियों से प्रेरणा लेकर अपने गेम बनाने की सलाह दी गई, वहीं मार्क्स के दबाव पर उन्होंने साफ कहा कि ‘मार्क्स-मार्क्स’ की बीमारी से बाहर निकलना जरूरी है और स्किल व मार्क्स—दोनों में संतुलन ही सही रास्ता है।
27 जनवरी को 9वें एडिशन का वीडियो रिलीज हुआ था, जिसमें पीएम अलग-अलग लोकेशन पर बच्चों से बातचीत करते दिखे थे। 2026 के इस पहले एपिसोड की मेजबानी भी दिल्ली स्थित पीएम आवास पर हुई, जहां बच्चों की बनाई पेंटिंग्स और उनकी रचनात्मकता को प्रधानमंत्री ने करीब से देखा।
‘परीक्षा पे चर्चा’ की शुरुआत 2018 में हुई थी और तब से यह पहल छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए एक बड़ा मंच बन चुकी है। इसका उद्देश्य बोर्ड परीक्षाओं से पहले तनाव कम करना, सकारात्मक सोच विकसित करना और परीक्षा को उत्सव की तरह लेने का संदेश देना रहा है। 10 फरवरी 2025 को टेलिकास्ट हुआ 8वां एडिशन तो वर्ल्ड रिकॉर्ड बना गया था, जिसमें दुनिया के 245 से ज्यादा देशों के छात्र और सैकड़ों देशों के शिक्षक व अभिभावक जुड़े थे। 2018 में जहां पहले एडिशन में करीब 22 हजार प्रतिभागी थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3.56 करोड़ रजिस्ट्रेशन तक पहुंच गई।
आज के दूसरे एपिसोड से भी छात्रों को नई प्रेरणा, आत्मविश्वास और दिशा मिलने की उम्मीद है—जहां परीक्षा सिर्फ नंबरों का नहीं, बल्कि सीखने और आगे बढ़ने का जरिया बनेगी।