बीते सप्ताह की भारी उठापटक के बाद सोमवार को सर्राफा बाजार में माहौल पूरी तरह बदलता नजर आया। सोना और चांदी—दोनों में एक साथ तेज उछाल देखने को मिला, जिससे बाजार में फिर से रौनक लौट आई। बुलियन कारोबारियों और निवेशकों में हलचल तेज हो गई, क्योंकि कीमतें एक झटके में ऊपरी स्तरों पर पहुंच गईं।
बुलियन मार्केट से मिली जानकारी के मुताबिक, चांदी की कीमतों में करीब ₹14,800 प्रति किलो की बड़ी छलांग लगी और यह बढ़कर लगभग ₹2.65 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गई। वहीं सोने के भाव भी मजबूती के साथ करीब ₹3,050 चढ़कर ₹1.58 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच गए। यह तेजी ऐसे वक्त आई है, जब हाल ही में बाजार में मुनाफावसूली के चलते दबाव देखा गया था।
डेरिवेटिव बाजार में भी मजबूती साफ दिखी। शुरुआती कारोबार में MCX पर चांदी करीब ₹5,185 महंगी होकर ₹2.49 लाख प्रति किलो पर ट्रेड करती दिखी, जबकि सोना ₹3,428 की तेजी के साथ ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम के पास पहुंच गया। घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संकेतों ने भी इस उछाल को सपोर्ट दिया।
एशियाई बाजारों में कीमती धातुओं में मजबूती देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड करीब 1.18% की बढ़त के साथ $5,040 प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि स्पॉट सिल्वर में 3.39% की तेजी दर्ज की गई और यह $79.89 प्रति औंस के आसपास कारोबार करता नजर आया। हालांकि, मौजूदा तेजी के बावजूद सोना और चांदी दोनों अभी अपने रिकॉर्ड हाई से नीचे बने हुए हैं—सोना अपने ऑल-टाइम हाई से करीब 11% नीचे है, जबकि चांदी जनवरी में बने उच्चतम स्तर से अब भी काफी नीचे कारोबार कर रही है।
बाजार जानकारों के मुताबिक, जापान में प्रधानमंत्री साने ताकाइची की चुनावी जीत के बाद उदार आर्थिक नीतियों की उम्मीदें बढ़ी हैं। इससे येन पर दबाव बना और वैश्विक निवेशकों का रुझान एक बार फिर सुरक्षित निवेश की ओर गया। इसी वजह से सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं को मजबूत सपोर्ट मिला।
आगे की दिशा अब अमेरिकी आंकड़ों पर निर्भर करती दिख रही है। निवेशकों की नजर अमेरिका से आने वाले रोजगार और महंगाई के आंकड़ों पर टिकी है, क्योंकि इन्हीं से Federal Reserve की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिलेंगे। ब्याज दरों को लेकर कोई भी बड़ा इशारा कीमती धातुओं की कीमतों में अगली चाल तय कर सकता है।
पिछले सप्ताह सोना-चांदी में आई गिरावट की वजह मुनाफावसूली, डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड्स में तेजी रही थी। लेकिन मौजूदा हालात में अंतरराष्ट्रीय राजनीति, करेंसी मूवमेंट और आर्थिक आंकड़े ही यह तय करेंगे कि यह तेजी कितनी दूर तक जाएगी।