रायपुर। परीक्षा पे चर्चा के दूसरे चरण में भी छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों, पालकों और शिक्षकों की जबरदस्त भागीदारी देखने को मिली। 9 फरवरी को आयोजित इस चरण का राज्यभर में व्यापक प्रसारण हुआ, जिसमें 36,905 विद्यालयों से कार्यक्रम दिखाया गया। इस दौरान 26.65 लाख विद्यार्थी, 1.54 लाख शिक्षक और 1.68 लाख पालक शामिल हुए, यानी कुल 29.89 लाख दर्शकों ने कार्यक्रम देखा। सामुदायिक सहभागिता को बढ़ाने के लिए पहले की तरह 478 सार्वजनिक स्थलों पर भी सामूहिक प्रसारण की व्यवस्था की गई, जहां करीब 42 हजार लोगों ने कार्यक्रम का लाभ उठाया।
दूसरे चरण की एक खास झलक रायपुर जिले के माना कैम्प स्थित पीएम श्री नवोदय विद्यालय से सामने आई, जहां कक्षा 11वीं के विद्यार्थी तेजस चन्द्राकर को प्रधानमंत्री से सीधे सवाल पूछने का अवसर मिला। तेजस ने परीक्षा के बाद घूमने-फिरने योग्य स्थलों के बारे में जानना चाहा। इस पर Narendra Modi ने उन्हें प्रेरक सलाह देते हुए कहा कि वे अपने निवास की तहसील से शुरुआत करें, फिर जिले और राज्य के प्रमुख दर्शनीय स्थलों की सूची बनाएं, यात्रा की योजना तैयार करें और हर भ्रमण को सीखने के अवसर के रूप में अपनाएं। प्रधानमंत्री की यह बात छात्रों में जिज्ञासा और सीखने की भावना को जोड़ने का संदेश लेकर आई।
इससे पहले 6 फरवरी को आयोजित पहले चरण में भी छत्तीसगढ़ से उत्साहजनक सहभागिता दर्ज की गई थी। तब राज्य के 36,903 विद्यालयों में कार्यक्रम का सीधा प्रसारण हुआ था, जिसे 26.65 लाख विद्यार्थियों, 1.54 लाख शिक्षकों और 1.68 लाख पालकों सहित कुल 29.87 लाख दर्शकों ने देखा। पहले चरण में महासमुंद जिले की कक्षा 12वीं की छात्रा सृष्टि साहू को प्रधानमंत्री से सवाल पूछने का मौका मिला था, जिसने पूरे राज्य के विद्यार्थियों को खास तौर पर प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने छात्रों को तकनीक के इस्तेमाल को लेकर अहम संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी को खुद पर हावी न होने दें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का उपयोग मार्गदर्शन और काम में सुधार के लिए करें, न कि सीखने के विकल्प के रूप में। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि कुछ बच्चों की दिनचर्या मोबाइल और स्क्रीन पर अत्यधिक निर्भर होती जा रही है, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया कि हर युग में नई तकनीकों को लेकर आशंकाएं रही हैं और डर की बजाय संतुलित उपयोग ही समाधान है।
कुल मिलाकर, परीक्षा पे चर्चा के दूसरे चरण ने भी छत्तीसगढ़ में शिक्षा, संवाद और सामूहिक सहभागिता का मजबूत उदाहरण पेश किया है, जहां लाखों बच्चों और अभिभावकों ने एक साथ जुड़कर सीखने की प्रक्रिया को उत्सव की तरह अपनाया।