छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ अब तक की बड़ी कार्रवाइयों में से एक सामने आई है। एंटी नारकोटिक टास्क फोर्स (ANTF) ने बीते 24 घंटे में तीन अलग-अलग थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर कुल 132.5 किलोग्राम गांजा जब्त किया है। इसकी अनुमानित कीमत ₹66.25 लाख बताई जा रही है। कार्रवाई में एक महिला सहित 11 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है, जो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा—तीन राज्यों से जुड़े बताए जा रहे हैं। तस्करी में इस्तेमाल 6 कारें भी सीज की गई हैं, जिनकी कीमत करीब ₹55 लाख आंकी गई है।
पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन निश्चय’ के तहत अंजाम दी गई। सिंघोड़ा, कोमाखान और बागबाहरा थाना क्षेत्रों में महज 6 घंटे के भीतर थोक विक्रेता से लेकर खरीदार तक पूरे नेटवर्क को दबोच लिया गया। इस समन्वित ऑपरेशन में रायपुर, राजनांदगांव और भंडारा जिलों की पुलिस का सहयोग भी मिला। खास बात यह रही कि साइबर थाना की डेटा एनालिटिक्स और इंटेलिजेंस डेस्क ने इनपुट्स को जोड़कर कार्रवाई को निर्णायक बनाया।
सिंघोड़ा क्षेत्र में सोनपुर (ओडिशा) से आ रही दो सफेद कारों—स्विफ्ट डिज़ायर और टाटा इंडिका—को नेशनल हाईवे-53 पर नाकाबंदी कर रोका गया। तलाशी में 52.5 किलो गांजा, 4 मोबाइल और ₹10,000 नकद बरामद हुए। एक आरोपी मौके से फरार भी हुआ, जिसकी तलाश जारी है।
कोमाखान में मुखबिर सूचना पर बोलेरो से 40 किलो गांजा पकड़ा गया। यहां तीन-लेयर नेटवर्क—परिवहनकर्ता, विक्रेता और खरीदार—का खुलासा हुआ। पकड़े गए आरोपियों में ओडिशा और महाराष्ट्र के वे नाम शामिल हैं, जिन पर पहले से एनडीपीएस के मामले दर्ज हैं। दो और कारें भी जब्त की गईं।
बागबाहरा में हुंडई वेरना से 40 किलो गांजा मिला। वाहन में सवार एक पुरुष के साथ एक महिला आरोपी भी पकड़ी गई, जिसके बारे में पुलिस का कहना है कि वह पहले भी ओडिशा रूट से तस्करी कर चुकी है।
सभी आरोपियों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटैंसेज़ एक्ट की धारा 20(बी) के तहत केस दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि फरार आरोपियों और सप्लाई चेन के शेष सिरों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।