ChatGPT में विज्ञापनों की एंट्री: ओपनएआई ने क्यों शुरू किया Ads का ट्रायल, फ्री यूजर्स पर क्या होगा असर

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दुनिया की अग्रणी एआई कंपनी OpenAI ने अपने लोकप्रिय चैटबॉट ChatGPT को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अब तक बिना किसी विज्ञापन के इस्तेमाल होने वाला चैटजीपीटी जल्द ही सीमित विज्ञापनों के साथ दिख सकता है। हालांकि यह बदलाव सभी यूजर्स के लिए नहीं होगा। कंपनी ने साफ किया है कि फिलहाल यह ट्रायल केवल फ्री और कम कीमत वाले ‘गो’ प्लान यूजर्स के लिए है, जबकि प्रीमियम सब्सक्रिप्शन लेने वालों को विज्ञापनों से पूरी तरह राहत मिलेगी।

ओपनएआई के मुताबिक, ये विज्ञापन किसी बैनर या पॉप-अप की तरह नहीं होंगे। इन्हें केवल जवाब के अंत में “स्पॉन्सर्ड लिंक्स” के रूप में दिखाया जाएगा। यानी जब चैटजीपीटी अपना पूरा जवाब दे देगा, तभी नीचे एक छोटा-सा विज्ञापन लिंक नजर आएगा। कंपनी का दावा है कि इन विज्ञापनों का चैटजीपीटी के जवाबों की क्वालिटी, निष्पक्षता या सटीकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

कंपनी ने यह फैसला दो अहम वजहों से लिया है। पहली वजह है खर्च। चैटजीपीटी जैसी एडवांस एआई टेक्नोलॉजी को चलाने, ट्रेन करने और लगातार अपडेट करने में भारी लागत आती है। विज्ञापनों से होने वाली आय इस खर्च को संभालने में मदद करेगी। दूसरी वजह है फ्री सर्विस को बनाए रखना। ओपनएआई चाहती है कि जो यूजर्स पैसे नहीं दे सकते, वे भी चैटजीपीटी का इस्तेमाल जारी रख सकें। विज्ञापनों से कमाई होगी, तो कंपनी फ्री एक्सेस को लंबे समय तक टिकाए रख पाएगी।

ओपनएआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि विज्ञापन और कंटेंट के बीच साफ फर्क रखा जाएगा। स्पॉन्सर्ड लिंक्स को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि यूजर को यह समझने में कोई भ्रम न हो कि कौन-सी जानकारी चैटजीपीटी की है और कौन-सा हिस्सा विज्ञापन है। जवाब के बीच में कोई ऐड नहीं आएगा, ताकि यूजर एक्सपीरियंस प्रभावित न हो।

विज्ञापन केवल फ्री और ‘गो’ प्लान यूजर्स को दिखेंगे। वहीं जिनके पास प्लस, प्रो, बिजनेस, एंटरप्राइज या एजुकेशन प्लान है, उन्हें चैटजीपीटी पूरी तरह एड-फ्री अनुभव देता रहेगा। यानी अगर कोई यूजर बिना किसी विज्ञापन के चैटजीपीटी इस्तेमाल करना चाहता है, तो उसे पेड प्लान में अपग्रेड करना होगा।

कुल मिलाकर, ओपनएआई का यह कदम एआई प्लेटफॉर्म को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की दिशा में देखा जा रहा है। कंपनी की कोशिश है कि एक तरफ फ्री यूजर्स को सेवा मिलती रहे और दूसरी तरफ टेक्नोलॉजी के बढ़ते खर्च का संतुलन भी बना रहे।

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