बीएचईएल में 5.3% हिस्सेदारी बिक्री का फैसला: सरकार का बड़ा विनिवेश दांव, निवेशकों के लिए नया मौका

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मुंबई के बाजार गलियारों में हलचल तेज है। केंद्र सरकार ने देश की दिग्गज सार्वजनिक क्षेत्र की इंजीनियरिंग कंपनी भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड यानी बीएचईएल में अपनी 5.3 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का फैसला लिया है। इस कदम के जरिए सरकार लगभग 4,650 करोड़ रुपए जुटाने की तैयारी में है। यह पूरी प्रक्रिया ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से की जा रही है, जो सीमित समय के लिए खुली रहेगी और बाजार में प्रत्यक्ष भागीदारी का अवसर देगी।

सरकार करीब 18.3 करोड़ शेयर बाजार में उतार रही है। इस पेशकश के लिए प्रति शेयर न्यूनतम यानी फ्लोर प्राइस 254 रुपए तय किया गया है। यानी निवेशक इस कीमत या उससे ऊपर बोली लगा सकते हैं। यह दाम मौजूदा बाजार भाव के संदर्भ में निवेशकों के लिए आकर्षण और जोखिम दोनों का मिश्रण हो सकता है, क्योंकि OFS में कीमत और मांग का संतुलन अहम भूमिका निभाता है।

नियमों के मुताबिक शुरुआती चरण में लगभग 10.4 करोड़ शेयरों की बिक्री की जाएगी। लेकिन अगर मांग उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो सरकार अतिरिक्त करीब 7 करोड़ शेयर और बेच सकती है। इसका सीधा अर्थ है कि बाजार की प्रतिक्रिया के आधार पर कुल बिक्री का आकार बढ़ सकता है। यह लचीलापन सरकार को अधिक राजस्व जुटाने का अवसर देता है, वहीं निवेशकों को बड़ी हिस्सेदारी लेने का मौका भी प्रदान करता है।

इस OFS में कर्मचारियों को भी नजरअंदाज नहीं किया गया है। करीब 87 लाख शेयर कंपनी के कर्मचारियों के लिए आरक्षित रखे गए हैं। यह कदम कर्मचारियों को कंपनी में प्रत्यक्ष भागीदारी का अवसर देता है और मनोबल बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। कर्मचारी वर्ग के लिए यह निवेश का अवसर होने के साथ-साथ कंपनी की दीर्घकालिक प्रगति से सीधे जुड़ने का माध्यम भी है।

ऑफर अलग-अलग निवेशक वर्गों के लिए चरणबद्ध तरीके से खुल रहा है। संस्थागत और गैर-खुदरा निवेशक पहले दिन बोली लगा सकेंगे, जबकि खुदरा निवेशकों और कर्मचारियों के लिए अगला दिन निर्धारित है। खुदरा निवेशकों के लिए यह अवसर महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि वे सीधे सरकार द्वारा तय फ्लोर प्राइस पर या उससे ऊपर शेयर खरीद सकते हैं।

यह पूरा कदम सरकार की व्यापक विनिवेश रणनीति का हिस्सा है। सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी घटाकर सरकार एक ओर राजस्व जुटाना चाहती है, तो दूसरी ओर बाजार में तरलता और जन-भागीदारी बढ़ाने की कोशिश भी करती है। हालांकि, बाजार पर इसका असर कई कारकों पर निर्भर करेगा—मांग की स्थिति, समग्र बाजार रुझान और निवेशकों का भरोसा।

अल्पकाल में OFS की वजह से शेयर पर दबाव दिख सकता है, क्योंकि बड़ी मात्रा में शेयर बाजार में आते हैं। लेकिन यदि निवेशकों की मजबूत मांग रही, तो यह संकेत देगा कि कंपनी में भरोसा कायम है। दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह फैसला कंपनी के मूलभूत प्रदर्शन, ऑर्डर बुक और भविष्य की परियोजनाओं के संदर्भ में आंका जाएगा।

कुल मिलाकर, बीएचईएल में 5.3 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री केवल एक वित्तीय लेन-देन नहीं है, बल्कि यह सरकार की विनिवेश नीति, बाजार की धारणा और निवेशकों की रणनीति—तीनों का संगम है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बाजार इस पेशकश को किस नजर से देखता है और मांग का स्तर सरकार की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।

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