तिमाही धमाका और बाजार में बाजी — एसबीआई ने टीसीएस को पछाड़ देश की चौथी सबसे बड़ी कंपनी बनने का ताज पहना

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मजबूत तिमाही नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब प्रदर्शन दमदार हो तो बाजार खुद रास्ता बना देता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने क्वार्टर-3 के शानदार परिणामों के बाद शेयर बाजार में ऐसी छलांग लगाई कि उसने आईटी दिग्गज टीसीएस को पीछे छोड़ते हुए मार्केट कैप के लिहाज से देश की चौथी सबसे बड़ी कंपनी का स्थान हासिल कर लिया। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि निवेशकों के भरोसे की बड़ी मुहर है।

11 फरवरी को बाजार में एसबीआई के शेयरों में तीन प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। सत्र के अंत में शेयर 1181.10 रुपये पर बंद हुआ और दिन के दौरान 1187.50 रुपये का नया 52 हफ्तों का उच्च स्तर भी छू लिया। इस तेजी के साथ बैंक का मार्केट कैप बढ़कर 10.9 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं दूसरी ओर टीसीएस का मार्केट कैप घटकर 10.53 लाख करोड़ रुपये पर आ गया, क्योंकि उसका शेयर करीब 2.5 प्रतिशत गिरकर 2909 रुपये पर बंद हुआ।

मार्केट कैप की रैंकिंग में पहले स्थान पर रिलायंस इंडस्ट्रीज कायम है, जिसका बाजार मूल्य लगभग 19.88 लाख करोड़ रुपये है। दूसरे नंबर पर एचडीएफसी बैंक और तीसरे स्थान पर भारती एयरटेल हैं। अब चौथे स्थान पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पांचवें स्थान पर टीसीएस पहुंच गई है। यह बदलाव बाजार की प्राथमिकताओं और निवेशकों की बदलती धारणा को भी दर्शाता है।

दरअसल, एसबीआई के तिमाही नतीजों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही में बैंक ने 21028.15 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो अब तक का उसका सर्वाधिक तिमाही मुनाफा है। पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 16891.44 करोड़ रुपये था, यानी लगभग 24.49 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़त। यह वृद्धि बताती है कि बैंक की कमाई की क्षमता लगातार मजबूत हो रही है।

नेट इंटरेस्ट इनकम में भी नौ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 45190 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। एसेट क्वालिटी में सुधार ने तस्वीर को और सकारात्मक बनाया। ग्रॉस एनपीए घटकर 1.57 प्रतिशत पर आ गया, जो पिछली तिमाही में 1.73 प्रतिशत था। वहीं नेट एनपीए भी 0.42 प्रतिशत से घटकर 0.39 प्रतिशत पर आ गया। यह संकेत है कि बैंक की बैलेंस शीट पहले से अधिक मजबूत हो रही है और खराब कर्ज का दबाव कम हो रहा है।

प्रोविजनिंग में भी कमी आई है। यह घटकर 4506 करोड़ रुपये रह गई, जबकि पिछली तिमाही में यह 5400 करोड़ रुपये थी। इसका अर्थ है कि बैंक की क्रेडिट लागत पर दबाव घट रहा है और जोखिम प्रबंधन बेहतर हुआ है। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के भरोसे एसबीआई प्रबंधन ने वित्त वर्ष 2026 के लिए लोन ग्रोथ गाइडेंस बढ़ाकर 13 से 15 प्रतिशत कर दी है, जो भविष्य को लेकर आत्मविश्वास का संकेत देती है।

कुल मिलाकर, यह उपलब्धि सिर्फ शेयर कीमतों की तेजी का परिणाम नहीं, बल्कि मजबूत बुनियादी प्रदर्शन, बेहतर एसेट क्वालिटी और स्थिर मुनाफे का नतीजा है। अब बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि एसबीआई अपनी इस रफ्तार को कितने लंबे समय तक बनाए रख पाता है और आने वाले महीनों में निवेशकों को कितनी और खुशखबरी देता है।

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