छत्तीसगढ़ में अप्रैल से फूड-ग्रेड फाइबर बोतलों में मिलेगी देशी-अंग्रेजी शराब, 35 नई दुकानों का रास्ता साफ

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में अप्रैल से शराब की पैकेजिंग में बड़ा बदलाव दिखेगा। राज्य सरकार की वर्ष 2026-27 की आबकारी नीति के तहत देशी और चुनिंदा श्रेणी की अंग्रेजी शराब अब फूड-ग्रेड फाइबर (RPET) बोतलों में उपलब्ध कराई जाएगी। इस कदम का उद्देश्य पैकेजिंग को अधिक सुरक्षित और रीसाइकिलेबल बनाना बताया गया है।

रीसाइकिल होंगी खाली बोतलें

नई व्यवस्था के तहत देशी मदिरा की आपूर्ति केवल फूड-ग्रेड रीसाइकिलेबल पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट (RPET) बोतलों में होगी। नीति में स्पष्ट किया गया है कि इन बोतलों के उपयोग और निस्तारण में छत्तीसगढ़ प्लास्टिक एवं अन्य जैव-अनाशित सामग्री (उपयोग व विनियमन) नियम, 2023 का पालन अनिवार्य रहेगा। उपयोग के बाद ये बोतलें रीसाइकिल की जा सकेंगी, जिससे कांच के अपशिष्ट और टूट-फूट से होने वाले जोखिम में कमी आने की उम्मीद है।

35 लंबित दुकानें अब खुल सकेंगी

पिछले वर्ष 67 नई मदिरा दुकानों को स्वीकृति दी गई थी, जिनमें से 35 दुकानें जन-विरोध के कारण नहीं खुल पाई थीं। नई नीति में इन शेष दुकानों को खोलने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। संबंधित जिलों के कलेक्टर नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर प्रस्ताव भेजेंगे, जिसके बाद दुकानें संचालित की जा सकेंगी। इसका उद्देश्य अवैध मदिरा विक्रय पर नियंत्रण बताया गया है, खासकर मदिरा-विहीन, उपयोजना और अंतरराज्यीय सीमावर्ती क्षेत्रों में।

प्रीमियम विदेशी मदिरा की अलग दुकानें

मंत्रिपरिषद के 21 जनवरी 2026 के निर्णय के अनुसार, आवश्यकता के आधार पर पृथक प्रीमियम विदेशी मदिरा दुकानें भी खोली जा सकेंगी। जिला कलेक्टर जांच के बाद प्रस्ताव आबकारी आयुक्त को भेजेंगे और शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा।

पैकेजिंग के नियम

देशी शराब 750 एमएल, 375 एमएल और 180 एमएल की RPET बोतलों में उपलब्ध होगी। बोतलों का आकार अंडाकार या बेलनाकार होगा और उन पर “छ.ग.दे. म.” उत्कीर्ण करना अनिवार्य रहेगा। सभी बोतलों पर एक्साइज एडेसिव लेबल (EAL) चस्पा करना भी जरूरी होगा।

विदेशी मदिरा की न्यूनतम ड्यूटी स्लैब वाली श्रेणी RPET बोतलों में दी जाएगी, जबकि अन्य श्रेणियों में कांच या फूड-ग्रेड RPET—किसी एक माध्यम—का चयन निर्माता कर सकेंगे। एक ही ब्रांड को कांच और फाइबर दोनों में एक साथ उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।

नई नीति के साथ राज्य में पैकेजिंग, पर्यावरण और खुदरा नेटवर्क—तीनों स्तरों पर बदलाव देखने को मिलेंगे। अब देखना होगा कि जमीनी स्तर पर इन प्रावधानों का क्रियान्वयन किस तरह होता है।

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