अमेरिका में EV बैटरी जॉइंट वेंचर पर संकट: सैमसंग SDI के साथ साझेदारी से बाहर निकल सकती है स्टेलेंटिस

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अमेरिका में इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी उत्पादन को लेकर बड़ी रणनीतिक हलचल सामने आई है। Stellantis दक्षिण कोरिया की बैटरी निर्माता Samsung SDI के साथ अपने संयुक्त उपक्रम से बाहर निकलने पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी बदलती बाजार परिस्थितियों के बीच अपनी ईवी रणनीति की समीक्षा कर रही है।

कब और क्यों हुई थी साझेदारी?

साल 2022 में दोनों कंपनियों ने अमेरिका में अरबों डॉलर निवेश कर ईवी बैटरी निर्माण की घोषणा की थी। यह जॉइंट वेंचर StarPlus Energy नाम से स्थापित किया गया था। योजना के तहत इंडियाना के कोकोमो शहर में दो बड़े बैटरी प्लांट लगाए जाने थे, ताकि अमेरिकी बाजार में बढ़ती ईवी मांग को पूरा किया जा सके।

उस समय इलेक्ट्रिक वाहनों के तेजी से विस्तार को देखते हुए यह निवेश एक दूरदर्शी कदम माना गया था।

अब पीछे हटने की वजह क्या?

हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका में ईवी की मांग उम्मीद से कम रही है। इससे कंपनियों पर लागत और निवेश को लेकर दबाव बढ़ा है। स्टेलेंटिस अपने संभावित नुकसान को सीमित करने के विकल्प तलाश रही है।

कंपनी ने हाल ही में अपनी ईवी यूनिट से जुड़े कारोबार में 26 अरब डॉलर के बड़े मूल्यह्रास (write-down) की घोषणा भी की है। इससे संकेत मिलता है कि ईवी बिक्री के अनुमान वास्तविकता से अधिक थे।

स्टेलेंटिस के पोर्टफोलियो में Jeep और Fiat जैसे प्रमुख ब्रांड शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि वह सैमसंग के साथ “स्टारप्लस एनर्जी संयुक्त उपक्रम के भविष्य पर सहयोगात्मक चर्चा” जारी रखे हुए है।

अमेरिकी बाजार में मांग क्यों घटी?

ईवी बिक्री पर नीतिगत बदलावों का भी असर पड़ा है। पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के प्रशासन के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने वाली कुछ प्रोत्साहन योजनाओं में कटौती की गई थी, जिससे उपभोक्ता मांग प्रभावित हुई। इसके अलावा ब्याज दरों में वृद्धि और ईवी की ऊंची कीमतें भी बाजार पर असर डाल रही हैं।

स्टेलेंटिस की पृष्ठभूमि

स्टेलेंटिस का गठन 2021 में PSA Group और Fiat Chrysler Automobiles के विलय से हुआ था। यह वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग की प्रमुख कंपनियों में से एक है और अब अपनी ईवी रणनीति को नए सिरे से संतुलित करने की दिशा में कदम उठा रही है।

बदलते बाजार संकेतों के बीच स्टेलेंटिस का यह संभावित फैसला वैश्विक ईवी निवेश पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कंपनी अंतिम रूप से क्या निर्णय लेती है।

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