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साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ तक: मोदी ने नए PMO का किया उद्घाटन, दीवार पर लिखा— ‘नागरिक देवो भव’

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देश की सत्ता के प्रतीक रहे साउथ ब्लॉक से अब एक नए प्रशासनिक युग की शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शुक्रवार को नए प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया। इसके साथ ही पीएमओ अब रायसीना हिल स्थित ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक से नए कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट हो जाएगा।

उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री ने परिसर में लगी ‘सेवा तीर्थ’ की पट्टिका का अनावरण किया। इमारत की दीवार पर देवनागरी में ‘सेवा तीर्थ’ अंकित है और उसके नीचे ‘नागरिक देवो भव’—अर्थात नागरिक भगवान के समान हैं—का मंत्र लिखा गया है। यह संदेश नए प्रशासनिक ढांचे की जन-केंद्रित सोच को दर्शाता है।

तीन इमारतों में संचालित होगा प्रशासन

सेवा तीर्थ परिसर में तीन मुख्य भवन हैं—सेवा तीर्थ-1, सेवा तीर्थ-2 और सेवा तीर्थ-3।

  • सेवा तीर्थ-1 में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) कार्य करेगा।

  • सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय पहले ही सितंबर 2025 में शिफ्ट हो चुका है।

  • सेवा तीर्थ-3 में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval का कार्यालय होगा।

आज PMO और NSCS का औपचारिक रूप से यहां स्थानांतरण पूरा हो जाएगा। शाम करीब 6 बजे प्रधानमंत्री कर्तव्य भवन-1 और 2 का भी उद्घाटन करेंगे, जहां कई प्रमुख मंत्रालयों के नए कार्यालय होंगे।

साउथ ब्लॉक में आखिरी कैबिनेट बैठक

नए परिसर में शिफ्ट होने से पहले प्रधानमंत्री साउथ ब्लॉक में केंद्रीय कैबिनेट की विशेष बैठक की अध्यक्षता करेंगे। यह ब्रिटिश काल की सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग में अंतिम कैबिनेट बैठक होगी। करीब 78 वर्षों तक नॉर्थ और साउथ ब्लॉक देश की सत्ता का केंद्र रहे हैं। अब सरकार की योजना है कि इन ऐतिहासिक इमारतों को ‘युगे-युगेन भारत’ नामक राष्ट्रीय संग्रहालय में बदला जाए, जहां भारत की सभ्यता और विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा।

₹1189 करोड़ की लागत से तैयार

सेवा तीर्थ, जिसका अर्थ है ‘सेवा का स्थान’, पहले ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ कहलाता था। 2 दिसंबर 2025 को इसका नाम बदलकर सेवा तीर्थ रखा गया। करीब 2.26 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैले इस परिसर का निर्माण एल एंड टी कंपनी ने लगभग ₹1189 करोड़ की लागत से किया है।

नए PMO के पास ही प्रधानमंत्री का नया आवास भी निर्माणाधीन है, जिसके पूरा होने पर वे 7, लोक कल्याण मार्ग से नए आवास में शिफ्ट होंगे।

कर्तव्य भवन और सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट

सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1, 2 सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा हैं। इसी परियोजना के तहत नया संसद भवन और कर्तव्य पथ विकसित किए गए हैं। कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति, विधि, सूचना-प्रसारण, कृषि और जनजातीय कार्य जैसे कई मंत्रालयों को स्थान दिया गया है।

इमारतों को 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है। इनमें रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम, जल संरक्षण, वेस्ट मैनेजमेंट और ऊर्जा-कुशल निर्माण तकनीकों का उपयोग किया गया है। साथ ही स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, सर्विलांस नेटवर्क और एडवांस्ड इमरजेंसी सिस्टम जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं भी मौजूद हैं।

नए दौर की शुरुआत

सरकार का कहना है कि पुराने भवनों में बिखरे मंत्रालयों के कारण तालमेल, संचालन और रखरखाव से जुड़ी चुनौतियां थीं। नए कॉम्प्लेक्स के जरिए प्रशासनिक कार्यों को एक ही परिसर में आधुनिक सुविधाओं के साथ संचालित किया जाएगा।

साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ तक का यह परिवर्तन सिर्फ स्थानांतरण नहीं, बल्कि प्रशासनिक संरचना में एक बड़े बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है—जहां दीवार पर लिखा ‘नागरिक देवो भव’ शासन की नई प्राथमिकता को दर्शाता है।

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