सेबी की हरी झंडी के बाद IPO बाजार में हलचल, ड्यूरोफ्लेक्स समेत 5 कंपनियां लाएंगी पब्लिक इश्यू

Spread the love

भारतीय शेयर बाजार में आने वाले महीनों में नई हलचल देखने को मिल सकती है। Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने ड्यूरोफ्लेक्स और हेक्सागन न्यूट्रिशन सहित कुल पांच कंपनियों के आईपीओ प्रस्तावों पर अपनी ‘ऑब्जर्वेशन’ जारी कर दी है। इसका मतलब है कि रेगुलेटर को अब इनके ड्राफ्ट पेपर्स पर कोई बड़ी आपत्ति नहीं है और कंपनियां जल्द ही अपना पब्लिक इश्यू लॉन्च कर सकती हैं।

जिन कंपनियों को मंजूरी मिली है उनमें Duroflex, Hexagon Nutrition, Premier Industrial Corporation, Virupaksha Organics और Om Power Transmission शामिल हैं। ये कंपनियां फ्रेश इश्यू और ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बाजार से पूंजी जुटाने की योजना बना रही हैं।

ड्यूरोफ्लेक्स करीब 183.6 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी करेगी, जबकि प्रमोटर्स और मौजूदा निवेशक 2.25 करोड़ शेयर OFS के तहत बेचेंगे। यह स्लीप सॉल्यूशंस कंपनी मैट्रेस, फोम, बेड और पिलो के लिए जानी जाती है और ऑर्थोपेडिक गद्दों के सेगमेंट में मजबूत पहचान रखती है। जुटाई गई रकम का उपयोग कर्ज चुकाने और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने में किया जा सकता है।

विरूपाक्ष ऑर्गेनिक्स का आईपीओ पूरी तरह फ्रेश इश्यू होगा, जिसके जरिए कंपनी लगभग 740 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। यह रिसर्च-आधारित फार्मा कंपनी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) और इंटरमीडिएट्स बनाती है, जिनका उपयोग दवाइयों के निर्माण में होता है।

प्रीमियर इंडस्ट्रियल 2.25 करोड़ नए शेयर जारी करेगी और 54 लाख शेयर OFS के जरिए बेचे जाएंगे। कंपनी वेल्डिंग इंडस्ट्री के लिए फेरो अलॉय पाउडर, मेटल पाउडर और विभिन्न प्रकार के वायर तैयार करती है। वहीं ओम पावर ट्रांसमिशन 90 लाख नए शेयर जारी करेगी और 10 लाख शेयर प्रमोटर्स बेचेंगे। यह कंपनी पावर ट्रांसमिशन लाइनों और सब-स्टेशनों के निर्माण व रखरखाव में सक्रिय है।

हेक्सागन न्यूट्रिशन का आईपीओ पूरी तरह OFS आधारित होगा, जिसमें 3.08 करोड़ शेयर मौजूदा शेयरधारकों द्वारा बेचे जाएंगे। इस प्रक्रिया में कंपनी को कोई नया फंड नहीं मिलेगा। यह कंपनी बच्चों के हेल्थ ड्रिंक्स, क्लिनिकल न्यूट्रिशन फूड और न्यूट्रिशनल प्रीमिक्स तैयार करती है और कई बड़े ब्रांड्स को सप्लाई भी करती है।

सेबी की मंजूरी का अर्थ यह नहीं है कि आईपीओ तुरंत आ जाएगा, बल्कि यह संकेत है कि कंपनियां अब अपनी लॉन्च डेट और प्राइस बैंड तय कर सकती हैं। फ्रेश इश्यू में कंपनी नए शेयर जारी कर सीधे फंड जुटाती है, जबकि OFS में मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचते हैं और रकम उन्हीं के पास जाती है।

इन पांच कंपनियों की एंट्री से प्राथमिक बाजार में नई गतिविधि देखने को मिल सकती है, खासकर ऐसे समय में जब निवेशक गुणवत्ता वाली कंपनियों के आईपीओ का इंतजार कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *