आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया अब सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रही, बल्कि कमाई के नए मॉडल्स की ओर भी तेजी से बढ़ रही है। एआई प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापनों की शुरुआत इसी बदलाव का संकेत है। जहां एक ओर OpenAI और Google एआई में ऐड-इंटीग्रेशन की दिशा में प्रयोग कर रहे हैं, वहीं Anthropic ने इस रास्ते से दूरी बनाने का फैसला किया है।
OpenAI की रणनीति: कंट्रोल के साथ विज्ञापन मॉडल
OpenAI ने चुनिंदा यूजर्स के लिए ChatGPT में विज्ञापनों की टेस्टिंग शुरू कर दी है। कंपनी के मुताबिक, ये विज्ञापन सिर्फ फ्री और Go प्लान यूजर्स को दिखाई देंगे। पेड सब्सक्रिप्शन प्लान पूरी तरह ऐड-फ्री रहेंगे।
चैट में दिखाई देने वाले विज्ञापनों पर साफ “Sponsored” लेबल होगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। विज्ञापन यूजर की रुचि, ब्रॉड टॉपिक्स और पिछले ऐड-इंटरैक्शन के आधार पर दिखाए जाएंगे। दिलचस्प बात यह है कि फ्री यूजर चाहें तो विज्ञापन बंद कर सकते हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें रोजाना मिलने वाले फ्री मैसेज की संख्या कम हो जाएगी। यानी सुविधा और फ्रीडम के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।
Google का कदम: सर्च से सीधे शॉपिंग तक
Google ने एआई-आधारित सर्च अनुभव को और व्यावसायिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने ‘Direct Offers’ नाम से एक नया फीचर लॉन्च किया है। इसके तहत ब्रांड्स और रिटेलर्स अपने प्रोडक्ट्स सीधे एआई रिजल्ट्स में दिखा सकेंगे।
अब यूजर अगर किसी प्रोडक्ट की जानकारी, तुलना या रिव्यू के लिए एआई का इस्तेमाल करेगा, तो वहीं से उसे खरीदारी का विकल्प भी मिल सकता है। यह मॉडल Google को एआई से सीधी कमाई का रास्ता देता है। सर्च के एआई मोड में नए ऐड-फॉर्मेट्स की टेस्टिंग शुरू हो चुकी है, जिससे शॉपिंग और विज्ञापन का अनुभव और अधिक इंटीग्रेटेड हो जाएगा।
Anthropic का रुख: यूजर ट्रस्ट पहले
इसके उलट Anthropic ने साफ कर दिया है कि वह अपने एआई मॉडल्स में पारंपरिक विज्ञापन नहीं जोड़ेगा। कंपनी का मानना है कि चैट के बीच प्रमोशनल मैसेज या सेल्स पिच यूजर के भरोसे को कमजोर कर सकते हैं।
Anthropic की कमाई का मॉडल फिलहाल सब्सक्रिप्शन और एंटरप्राइज लाइसेंसिंग पर आधारित है। उनका फोकस एआई को भरोसेमंद और निष्पक्ष बनाए रखने पर है, बजाय उसे विज्ञापन प्लेटफॉर्म में बदलने के।
AI का भविष्य: सुविधा, कमाई और भरोसे की जंग
एआई में विज्ञापनों की एंट्री यह दिखाती है कि टेक कंपनियां अब सिर्फ टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि उसे एक मजबूत बिजनेस मॉडल में बदलना चाहती हैं। एक तरफ सुविधा और पर्सनलाइजेशन है, तो दूसरी तरफ यूजर ट्रस्ट और निष्पक्षता का सवाल भी खड़ा है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यूजर्स किस मॉडल को ज्यादा स्वीकार करते हैं—विज्ञापन-समर्थित फ्री एआई या पूरी तरह सब्सक्रिप्शन आधारित प्लेटफॉर्म।