अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक ऐसे सैन्य ऑपरेशन का जिक्र किया है, जिसने वैश्विक रणनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। नॉर्थ कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग सैन्य अड्डे पर सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि 3 जनवरी को वेनेजुएला में हुए ऑपरेशन के दौरान अमेरिका ने एक “सीक्रेट हथियार” का इस्तेमाल किया, जिसकी वजह से रूस और चीन के डिफेंस सिस्टम निष्क्रिय हो गए। ट्रम्प ने इस कथित तकनीक को ‘डिसकम्बोबुलेटर’ नाम दिया, लेकिन इसके तकनीकी विवरण साझा करने से इनकार कर दिया। उनका कहना था—“एक दिन सबको इसके बारे में पता चलेगा।”
ट्रम्प के मुताबिक, इस कार्रवाई में वेनेजुएलाई सैनिकों को “एक भी गोली चलाने का मौका” नहीं मिला। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रूसी और चीनी उपकरण काम नहीं कर पाए, जिससे विरोधी खेमे में उलझन की स्थिति पैदा हुई। इससे पहले भी उन्होंने एक इंटरव्यू में इस ऑपरेशन का जिक्र किया था, लेकिन तब भी उन्होंने कहा था कि उन्हें ज्यादा खुलासा करने की अनुमति नहीं है।
अमेरिकी जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन एयर फोर्स जनरल डैन केन के अनुसार, इस मिशन के लिए 20 अलग-अलग ठिकानों से 150 से अधिक विमानों ने उड़ान भरी। इनमें बॉम्बर्स, फाइटर जेट, इंटेलिजेंस और सर्विलांस प्लेटफॉर्म शामिल थे। ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सैनिक हेलिकॉप्टरों के जरिए रात के अंधेरे में कराकास पहुंचे और तत्कालीन राष्ट्रपति Nicolás Maduro तथा उनकी पत्नी Cilia Flores को हिरासत में लिया गया।
वेनेजुएला के अधिकारियों ने दावा किया कि इस कार्रवाई की शुरुआत भारी बमबारी से हुई, जिसमें सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। स्थानीय आंकड़ों के मुताबिक 83 लोगों की मौत हुई और 112 से ज्यादा घायल हुए। ट्रम्प ने कहा कि किसी अमेरिकी सैनिक की मौत नहीं हुई, हालांकि तीन हेलिकॉप्टर पायलट घायल हुए।
इस ऑपरेशन के बाद एक और बड़ा आरोप सामने आया—अमेरिका पर “सोनिक” या “डायरेक्टेड एनर्जी” हथियार इस्तेमाल करने का। The New York Times और CNN की रिपोर्ट्स में ऐसे लक्षणों का जिक्र हुआ, जिनमें रडार सिस्टम अचानक बंद होना, सैनिकों का असामान्य शारीरिक कष्ट महसूस करना और तेज तरंगों जैसा अनुभव शामिल था। एक वेनेजुएलाई सुरक्षा गार्ड के हवाले से बताया गया कि ऑपरेशन शुरू होते ही रडार सिस्टम ठप हो गए और कुछ ही सेकेंड में आसमान ड्रोन से भर गया। उसके अनुसार, किसी अज्ञात तरंग या ध्वनि प्रभाव के बाद कई सैनिक जमीन पर गिर पड़े, कुछ की नाक से खून बहा और कुछ को उल्टियां हुईं।
विश्लेषकों ने संकेत दिया कि ये लक्षण “डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स” से मेल खा सकते हैं—ऐसी तकनीक जिसमें माइक्रोवेव या लेजर ऊर्जा का इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिकी सेना के पास पहले से ‘एक्टिव डिनायल सिस्टम’ नाम का एक नॉन-लीथल हथियार है, जो अदृश्य इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों से तीव्र गर्मी का एहसास कराता है और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए डिजाइन किया गया है। हालांकि इस विशेष ऑपरेशन में उसका उपयोग हुआ या नहीं, इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि मादुरो राष्ट्रपति भवन में एक किले जैसी सुरक्षा के बीच मौजूद थे। कथित तौर पर वहां स्टील की दीवारों वाला सेफ रूम था, लेकिन अमेरिकी बलों की तेजी के कारण वे उसमें पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सके। जनरल डैन केन के अनुसार, इस मिशन की महीनों तक रिहर्सल की गई थी—यहां तक कि मादुरो के निवास जैसा नकली भवन बनाकर प्रशिक्षण दिया गया। ऑपरेशन को पूर्ण अंधेरे में अंजाम दिया गया और पूरी कार्रवाई 30 मिनट से कम समय में समाप्त हो गई।
ट्रम्प का यह दावा अभी भी रहस्य और विवाद से घिरा है। “डिसकम्बोबुलेटर” नामक कथित तकनीक की वास्तविक प्रकृति क्या है—क्या यह साइबर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, ड्रोन स्वार्मिंग या डायरेक्टेड एनर्जी का मिश्रण है—इस पर आधिकारिक चुप्पी बरकरार है। लेकिन इतना तय है कि इस बयान ने वैश्विक रक्षा रणनीति, उभरती सैन्य तकनीकों और महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा पर नई बहस छेड़ दी है।