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‘CG Government’ लिखी गाड़ियों से ले जाया जाता था नाबालिग को, दुर्ग गैंगरेप केस में नए खुलासों से सनसनी

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में PWD विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस की जांच में यह खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने वारदात के लिए सरकारी काम में लगी गाड़ियों का इस्तेमाल किया। इन गाड़ियों में से एक पर “On Duty CG Government” लिखा हुआ पाया गया, जिसे अब जब्त कर लिया गया है।

पुलिस ने इस मामले में आरोपी भीमनारायण पांडेय और संजय पंडित को कोर्ट की अनुमति के बाद दो दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान दोनों को दुर्ग रेस्ट हाउस, PWD रेस्ट हाउस, उतई रेस्ट हाउस और अन्य संदिग्ध स्थानों पर ले जाया गया। गवाहों की मौजूदगी में घटनास्थलों का निरीक्षण किया गया और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई। रिमांड के दौरान घटना में इस्तेमाल मोबाइल फोन और वाहन भी बरामद किए गए। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में केंद्रीय जेल भेज दिया गया।

इस मामले में अब तक सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें विजय स्वाइन, अनिल चौधरी, गोविंद सिंह नागवंशी, कृपा शंकर उर्फ राजू कश्यप, अमित वर्मा, भीमनारायण पांडेय और संजय पंडित शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्य भी एकत्र किए जा रहे हैं और जांच जारी है।

पीड़िता ने महिला थाने में दर्ज शिकायत में आरोप लगाया है कि उसके साथ करीब सात वर्षों तक शोषण होता रहा। वर्ष 2018 में जब वह अपनी मां के साथ बिलासपुर से दुर्ग आई, तब नौकरी दिलाने के बहाने उसे PWD विभाग के संपर्क में लाया गया। मां को झाड़ू-पोछा का काम दिलवाया गया और विभागीय क्वार्टर में ठहराया गया। आरोप है कि मां के काम पर जाने के दौरान नाबालिग के साथ पहली बार दुष्कर्म हुआ और बाद में धमकी देकर उसे चुप रहने के लिए मजबूर किया गया।

लॉकडाउन के दौरान मां-बेटी दुर्ग से लौट गईं, लेकिन बाद में दोबारा संपर्क होने पर कथित तौर पर फिर से शोषण शुरू हुआ। पीड़िता का आरोप है कि नौकरी का दबाव बनाकर उसे रेस्ट हाउस और अन्य स्थानों पर बुलाया जाता था। व्हाट्सऐप के जरिए आपत्तिजनक फोटो और वीडियो की मांग की जाती थी और मना करने पर वायरल करने की धमकी दी जाती थी।

मामले में यह भी आरोप है कि एक आरोपी ने खुद को दुर्ग सांसद विजय बघेल का पूर्व पीए बताया, हालांकि सांसद ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह उनका निजी सहायक नहीं था और केवल विभागीय अटैचमेंट में कार्यरत था।

पीड़िता के अनुसार, संविदा नौकरी मिलने के बाद भी छुट्टियों के दिनों में उसे बुलाकर शोषण किया जाता रहा। 2024 और 2025 के दौरान अलग-अलग स्थानों—कवर्धा, पाटन और दुर्ग के एक होटल—में भी कथित दुष्कर्म की घटनाएं हुईं। आरोप है कि शादी तय होने के बाद भी आरोपियों ने उसे मानसिक दबाव में रखा और संबंध खत्म करने के नाम पर मिलने बुलाया।

आखिरकार पीड़िता ने अपने मंगेतर को पूरी बात बताई। मंगेतर के समर्थन के बाद उसने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद यह मामला सामने आया। पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और सभी आरोपियों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला न केवल कानून व्यवस्था बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और सत्ता-संबंधों के दावों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल सभी आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और अंतिम सच्चाई अदालत में ही तय होगी।

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