भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चिंता का साया गहराता दिख रहा है। लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ NIFTY IT Index 16 फरवरी को शुरुआती कारोबार में करीब 1% फिसलकर 32,360 के आसपास आ गया। महज चार सत्रों में इंडेक्स 9% से अधिक टूट चुका है। 2025 में लगभग 13% की गिरावट के बाद 2026 में अब तक करीब 15% की कमजोरी दर्ज हो चुकी है।
सेक्टर के दिग्गज शेयरों में दबाव साफ दिखा। Infosys 2% से ज्यादा गिरकर लगभग 1,341 रुपये पर आ गया—पिछले पांच दिनों में 10% से अधिक और एक महीने में 20% से ज्यादा की गिरावट। Tech Mahindra, Wipro और LTIMindtree में भी 1% के आसपास कमजोरी रही। Tata Consultancy Services और HCL Technologies लाल निशान में बंद हुए, जबकि Coforge और Persistent Systems में हल्की बढ़त दिखी।
गिरावट के पीछे प्रमुख कारण एआई से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का डर माना जा रहा है। हाल में Anthropic ने अपने Claude चैटबॉट के लिए लीगल एआई टूल लॉन्च किया, जिससे सॉफ्टवेयर सेवाओं की पारंपरिक मांग पर असर की आशंका जताई जा रही है। निवेशकों को चिंता है कि ऑटोमेशन और एआई-ड्रिवन टूल्स क्लाइंट्स की लागत घटाकर आईटी आउटसोर्सिंग की जरूरत कम कर सकते हैं।
वैश्विक कारकों ने भी सेंटीमेंट कमजोर किया है। ग्लोबल टेक शेयरों में नरमी, रुपये की कमजोरी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की बिकवाली ने दबाव बढ़ाया। अमेरिका में जनवरी की जॉब ग्रोथ उम्मीद से बेहतर रही और बेरोजगारी दर 4.3% पर आई, जिससे संकेत मिला कि फेड दरें कुछ समय स्थिर रख सकता है—यह भी उभरते बाजारों के लिए अनिश्चितता बढ़ाने वाला कारक है।
हालांकि, बाजार के कुछ जानकार इसे भावनात्मक प्रतिक्रिया मानते हैं। उनका तर्क है कि एआई एक प्रोडक्टिविटी टूल है जो इंजीनियरिंग क्षमता को तेज और बेहतर बना सकता है; जटिल एंटरप्राइज सिस्टम में मानव विशेषज्ञता की जरूरत खत्म नहीं होगी। जिन कंपनियों की एआई रणनीति स्पष्ट है और जिनके पास मजबूत डील पाइपलाइन है, वे इस बदलाव से लाभ उठा सकती हैं।
निष्कर्षतः, आईटी सेक्टर फिलहाल ट्रांजिशन फेज में है—जहां डर और अवसर साथ-साथ चल रहे हैं। निकट अवधि में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन दीर्घकाल में स्पष्ट रणनीति और मजबूत निष्पादन वाली कंपनियां वापसी कर सकती हैं।