एनएसई लिस्टिंग की राह साफ, दिल्ली हाईकोर्ट ने सेबी की एनओसी को दी मंजूरी

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करीब एक दशक से लंबित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की लिस्टिंग प्रक्रिया को आखिरकार बड़ी कानूनी राहत मिल गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने एनएसई के प्रस्तावित आईपीओ के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि इस स्तर पर अदालत के हस्तक्षेप का कोई ठोस आधार नहीं बनता। अदालत की टिप्पणी थी कि याचिका का उद्देश्य आईपीओ प्रक्रिया को बाधित करना प्रतीत होता है, इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

यह पूरा विवाद उस अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) से जुड़ा था, जिसे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी Securities and Exchange Board of India ने 30 जनवरी को जारी किया था। इस एनओसी के जरिए एनएसई को अपनी आईपीओ प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की अनुमति मिली थी। कोर्ट के फैसले के बाद अब इस मंजूरी के खिलाफ तत्काल कानूनी अड़चन समाप्त हो गई है।

फैसले के साथ ही एनएसई को लिस्टिंग से जुड़े आवश्यक दस्तावेज तैयार करने, मर्चेंट बैंकर और कानूनी सलाहकार नियुक्त करने का अधिकार भी प्रभावी रूप से मिल गया है। याचिका पूर्व न्यायिक अधिकारी केसी अग्रवाल द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सेबी के कॉरपोरेट एक्शन एडजस्टमेंट फ्रेमवर्क का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। यह ढांचा बोनस, स्टॉक स्प्लिट या विशेष डिविडेंड जैसी घोषणाओं के दौरान डेरिवेटिव ट्रेडर्स के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया है।

याचिकाकर्ता का कहना था कि कुछ मामलों में केवल कीमतों में बदलाव किया गया, जबकि अनुबंध की मात्रा में समायोजन नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डिविडेंड के बराबर राशि डेरिवेटिव ट्रेडर्स के खातों से काटी गई, जबकि कानून के अनुसार डिविडेंड का अधिकार केवल शेयरधारकों को होता है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि उनकी शिकायतों पर उचित सुनवाई नहीं हुई और सेबी ने स्वतंत्र जांच के बजाय एक्सचेंज के पक्ष को स्वीकार कर लिया।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। अदालत के फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सेबी द्वारा दी गई मंजूरी वैध है और आईपीओ की दिशा में आगे बढ़ने में कोई तात्कालिक बाधा नहीं है।

गौरतलब है कि एनएसई वर्ष 2016 से शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की कोशिश कर रहा है। को-लोकेशन विवाद और अन्य नियामकीय मुद्दों के कारण इसकी लिस्टिंग योजना बार-बार टलती रही। अब अदालत के इस फैसले ने बाजार को संकेत दिया है कि देश के सबसे बड़े एक्सचेंजों में से एक की लिस्टिंग की प्रक्रिया फिर पटरी पर आ सकती है।

अब निवेशकों और बाजार विश्लेषकों की नजर इस बात पर होगी कि एनएसई कितनी तेजी से अपने आईपीओ दस्तावेज तैयार कर औपचारिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है। यदि सब कुछ नियामकीय मानकों के अनुरूप रहा, तो यह भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक साबित हो सकता है।

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