मोदी-मैक्रों की दोस्ती फिर चर्चा में, भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार

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भारत और फ्रांस के संबंध एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के तीन दिवसीय भारत दौरे ने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नए सिरे से केंद्र में ला दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर बेहद आत्मीय अंदाज़ में उनका स्वागत करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि भविष्य की साझेदारी को नई ऊंचाई देने वाली है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में मैक्रों का भारत में स्वागत करते हुए भरोसा जताया कि दोनों देशों के बीच बातचीत रक्षा, तकनीक, व्यापार और वैश्विक सहयोग जैसे क्षेत्रों में और मजबूती लाएगी। उन्होंने मुंबई और बाद में दिल्ली में मुलाकात का जिक्र करते हुए मैत्रीपूर्ण संबोधन में मैक्रों को “मेरे प्यारे दोस्त” कहा, जो दोनों नेताओं के निजी समीकरण को भी दर्शाता है।

मैक्रों ने भी भारत यात्रा को विशेष बताया। उन्होंने कहा कि मुंबई से नई दिल्ली तक तीन दिनों की यह यात्रा दोनों देशों की स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को और आगे बढ़ाने के लिए समर्पित है। उनका संदेश साफ था—भारत और फ्रांस मिलकर वैश्विक स्तर पर सहयोग की नई दिशा तय करना चाहते हैं।

यह दौरा कई कारणों से अहम माना जा रहा है। भारत और फ्रांस के बीच रक्षा क्षेत्र में गहरा सहयोग पहले से मौजूद है, जिसमें उन्नत सैन्य तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक तालमेल शामिल है। अंतरिक्ष अनुसंधान, स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और उभरती तकनीकों में भी साझेदारी लगातार विस्तार पा रही है। ऐसे समय में जब वैश्विक शक्ति संतुलन बदल रहा है, दोनों देश बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और रणनीतिक स्वायत्तता के पक्षधर के रूप में साथ खड़े दिखाई देते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और फ्रांस की यूरोपीय तथा इंडो-पैसिफिक रणनीति के बीच तालमेल को और मजबूत करेगी। व्यापार और निवेश के नए अवसर, रक्षा सह-उत्पादन, हरित ऊर्जा परियोजनाएं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए समझौते संभव माने जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों की व्यक्तिगत मित्रता भी इस साझेदारी को अलग पहचान देती है। अंतरराष्ट्रीय मंचों—चाहे वह जी-20 हो या अन्य वैश्विक सम्मेलन—पर दोनों नेताओं की सहज केमिस्ट्री पहले भी चर्चा का विषय रही है। यही व्यक्तिगत विश्वास द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती देने में अहम भूमिका निभाता है।

कुल मिलाकर, मैक्रों का यह भारत दौरा केवल कूटनीतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक दिशा तय करने का अवसर है। दोस्ती से आगे बढ़कर अब यह साझेदारी वैश्विक सहयोग, सुरक्षा और आर्थिक प्रगति के साझा एजेंडे की ओर अग्रसर होती दिखाई दे रही है।

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