भारत ने इस महीने मुंबई तट से लगभग 100 नॉटिकल माइल पश्चिम में संदिग्ध गतिविधियों के चलते तीन तेल टैंकरों को रोककर जब्त कर लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार इन जहाजों के IMO नंबर उन पोतों से मेल खाते हैं, जिन पर पहले से अमेरिकी प्रतिबंध लगे हुए हैं। इसी आधार पर इनके ईरान से संभावित संबंधों की आशंका जताई जा रही है। हालांकि ईरान की नेशनल ईरानियन ऑयल कंपनी ने इन जहाजों से किसी भी प्रकार के जुड़ाव से साफ इनकार किया है।
सूत्रों के मुताबिक जब्त किए गए जहाजों के नाम स्टेलर रूबी, अस्फाल्ट स्टार और अल जफजिआ बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि ये पोत अपनी पहचान छिपाने के लिए बार-बार नाम, झंडा और रजिस्ट्रेशन डिटेल बदल रहे थे। शुरुआती जांच के बाद इन्हें मुंबई पोर्ट पर विस्तृत जांच के लिए लाया गया है। बताया जा रहा है कि इनकी मालिकाना हक विदेशी कंपनियों के पास है।
घटना के बाद Indian Coast Guard ने समुद्री निगरानी और सख्त कर दी है। सूत्रों के अनुसार भारतीय समुद्री क्षेत्र में 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है, जिसके लिए लगभग 55 जहाज और 10-12 विमान तैनात किए गए हैं। यह कदम संभावित अवैध समुद्री गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
शिपिंग डेटा से जुड़े जानकारों का कहना है कि अल जफजिआ नामक पोत ने वर्ष 2025 में ईरान से जिबूती तक फ्यूल ऑयल की खेप पहुंचाई थी। स्टेलर रूबी कथित तौर पर पहले ईरानी झंडे के तहत पंजीकृत रहा है, जबकि अस्फाल्ट स्टार चीन के समुद्री मार्गों पर सक्रिय रहा है।
अमेरिका के ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल ने पिछले वर्ष कुछ जहाजों पर प्रतिबंध लगाए थे। जिन IMO नंबरों पर बैन लगाया गया था, वे नंबर मुंबई के पास रोके गए जहाजों से मेल खाते बताए जा रहे हैं। इससे यह आशंका और गहरा गई है कि प्रतिबंधों से बचने के लिए जहाजों की पहचान बदली गई हो सकती है।
प्रतिबंधित तेल व्यापार आमतौर पर कम कीमत पर किया जाता है, क्योंकि इसमें कानूनी जोखिम अधिक होता है। ऐसे मामलों में बिचौलिये फर्जी दस्तावेज, समुद्र में जहाज-से-जहाज ट्रांसफर, और मालिकाना जानकारी में बदलाव जैसे तरीके अपनाते हैं, ताकि मूल स्रोत छिपाया जा सके।
फिलहाल भारतीय एजेंसियां सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। इस कार्रवाई को समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के अनुपालन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।