राजधानी दिल्ली में मौसम भले ही साफ नजर आ रहा हो और हवाएं सामान्य से तेज चल रही हों, लेकिन प्रदूषण का स्तर एक बार फिर चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। हवा की रफ्तार बढ़ने के बावजूद वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं दिखा, बल्कि कई इलाकों में हालात और बिगड़ते नजर आए। धूल और प्रदूषण से संवेदनशील लोग फिर से मास्क पहनने को मजबूर हो गए हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार सुबह 8 बजे दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 259 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। यह आंकड़ा सोमवार के मुकाबले अधिक है, जब AQI 214 रिकॉर्ड किया गया था। यानी महज 24 घंटे में हवा की गुणवत्ता में स्पष्ट गिरावट दर्ज की गई है।
शहर के कई वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों ने और भी चिंताजनक तस्वीर पेश की है। रोहिणी में AQI 340, अशोक विहार में 337, बराड़ी में 345 और मुंडका में 328 दर्ज किया गया—ये सभी आंकड़े ‘बेहद खराब’ श्रेणी को दर्शाते हैं। बवाना में 321 और चांदनी चौक में 302 का स्तर भी गंभीर चिंता पैदा करता है। हालांकि आनंद विहार में AQI 219 रहा, लेकिन वहां भी हवा ‘खराब’ श्रेणी में ही बनी हुई है।
दूसरी ओर, नेहरू नगर (257), द्वारका (234), इंडिया गेट (235), आईटीओ (236) और जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम (265) जैसे इलाकों में भी हवा की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं कही जा सकती। इन सभी स्थानों पर AQI ‘खराब’ स्तर पर बना हुआ है, जो खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए जोखिम बढ़ाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम, हवा की दिशा में बदलाव और स्थानीय स्तर पर धूल के बढ़ते कण इस उछाल की प्रमुख वजह हो सकते हैं। प्रदूषण के बढ़ते स्तर ने एक बार फिर राजधानी में पर्यावरणीय चुनौतियों को उजागर कर दिया है। साफ आसमान के बावजूद जहरीली हवा यह संकेत दे रही है कि समस्या सतही नहीं, बल्कि संरचनात्मक है।
दिल्लीवासियों के लिए यह स्थिति चेतावनी है कि मौसम में बदलाव भर से प्रदूषण खत्म नहीं होता। जब तक ठोस और दीर्घकालिक उपाय नहीं किए जाएंगे, तब तक हवा की गुणवत्ता में स्थायी सुधार की उम्मीद करना मुश्किल होगा।