बुधवार का दिन सर्राफा बाजार के लिए जबरदस्त हलचल भरा रहा। सोना और चांदी की कीमतों में ऐसा उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिसने निवेशकों को चौंका दिया। एक ओर बुलियन बाजार में चांदी ने तेज रफ्तार पकड़ी और 2,700 रुपये की मजबूती के साथ 2.33 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई, तो दूसरी ओर सोना भी 960 रुपये चढ़कर 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया। स्थानीय बाजार में यह तेजी निवेशकों के लिए उत्साह का संकेत थी, लेकिन तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं रही।
जैसे ही नजरें कमोडिटी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की ओर गईं, कहानी पलटती दिखी। Multi Commodity Exchange of India यानी MCX पर सोना-चांदी दबाव में रहे। यहां चांदी करीब 8,000 रुपये की गिरावट के साथ 2.59 लाख रुपये प्रति किलो तक फिसल गई, जबकि सोना 3,111 रुपये टूटकर 1.51 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। लोकल बाजार और वायदा बाजार के इस अंतर ने साफ कर दिया कि वैश्विक संकेतों का असर घरेलू ट्रेडिंग पर गहराई से पड़ रहा है।
दरअसल, एशियाई बाजारों में कारोबार सुस्त रहा। लूनर न्यू ईयर की छुट्टियों के चलते चीन, हांगकांग, सिंगापुर, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े बाजार बंद रहे, जिससे वैश्विक स्तर पर तरलता कम हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड लगभग 4,901 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि स्पॉट सिल्वर 1 प्रतिशत से ज्यादा फिसलकर 72.30 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। लगातार तीसरे सत्र की कमजोरी ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा फिलहाल डगमगाया हुआ है।
अगर रिकॉर्ड स्तर से तुलना करें तो तस्वीर और भी दिलचस्प हो जाती है। सोना अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 5,626.80 डॉलर प्रति औंस से करीब 15 प्रतिशत नीचे बना हुआ है। वहीं चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर 121.78 डॉलर प्रति औंस से लगभग 67 प्रतिशत नीचे है। यानी दोनों धातुएं अभी भी अपने ऐतिहासिक शिखर से काफी दूर हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव की रफ्तार निवेशकों को सतर्क रहने का संकेत दे रही है।
विशेषज्ञों की मानें तो इस पूरे उतार-चढ़ाव के पीछे अमेरिकी डॉलर की मजबूती बड़ी वजह है। डॉलर इंडेक्स 0.40 प्रतिशत बढ़कर 97.28 पर पहुंच गया, जिससे डॉलर में कीमत तय होने वाली धातुएं दूसरे देशों के खरीदारों के लिए महंगी हो गईं। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना-चांदी की मांग पर दबाव बढ़ता है और कीमतों में नरमी देखने को मिलती है। यही कारण है कि MCX पर गिरावट गहरी रही, जबकि स्थानीय बाजार में अलग रुझान दिखा।
अब बाजार की निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जनवरी बैठक के मिनट्स पर टिकी हैं। निवेशक यह जानना चाहते हैं कि आगे मौद्रिक नीति किस दिशा में जाएगी। ब्याज दरों को लेकर किसी भी संकेत का सीधा असर सोना-चांदी की चाल पर पड़ सकता है। यदि दरों में सख्ती का संकेत मिलता है तो कीमती धातुओं पर और दबाव बन सकता है, वहीं नरम रुख की संभावना इन्हें फिर से चमक दे सकती है।
कुल मिलाकर बुधवार का कारोबार यह संदेश दे गया कि सोना-चांदी की चाल अब सिर्फ घरेलू मांग पर नहीं, बल्कि वैश्विक संकेतों, डॉलर की दिशा और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर टिकी है। निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रणनीति अपनाने का है, क्योंकि बाजार की चमक के पीछे अनिश्चितता की परत भी उतनी ही गहरी है।