मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण के मोर्चे पर बड़ी और सुखद खबर आई है। दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता ‘गामिनी’ ने 18 फरवरी 2026 को तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। यह दूसरी बार है जब गामिनी मां बनी है, और इसे भारत में चीता पुनर्वास परियोजना की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
यह प्रसव भारतीय धरती पर चीतों का नौवां सफल जन्म है। नए शावकों के साथ भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है, जबकि देश में कुल चीतों की संख्या अब 38 तक पहुंच चुकी है। इससे स्पष्ट है कि पुनर्वास प्रयास धीरे-धीरे सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं।
संरक्षण परियोजना को मिली नई गति
भारत में चीतों की वापसी को ऐतिहासिक कदम माना गया था। दशकों पहले देश से विलुप्त हो चुकी इस प्रजाति को विशेष अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत फिर से बसाने की योजना बनाई गई। अफ्रीका से लाए गए चीतों को कूनो के अनुकूल वातावरण में बसाया गया, जहां उनकी निगरानी और देखभाल के लिए विशेष टीम तैनात है।
गामिनी का दोबारा मां बनना इस बात का संकेत है कि चीतों ने यहां के पर्यावरण में खुद को अनुकूलित करना शुरू कर दिया है। यह संरक्षण परियोजना के दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है।
अन्य चीते कहां हैं?
वर्तमान में तीन चीते मंदसौर स्थित Gandhi Sagar Sanctuary में रखे गए हैं, जबकि बाकी चीते कूनो नेशनल पार्क में ही स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं। वन विभाग की टीम लगातार उनकी गतिविधियों की निगरानी कर रही है और नवजात शावकों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
चीतों के सफल प्रजनन से उम्मीद जगी है कि आने वाले वर्षों में भारत में इस प्रजाति की स्थायी आबादी विकसित की जा सकेगी। वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षण विशेषज्ञों के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है कि देश में चीता पुनर्स्थापन की दिशा में प्रयास रंग ला रहे हैं।