अमेरिका की पहल पर अक्टूबर में लागू हुए संघर्षविराम के बाद गाजा में एक नई राजनीतिक और सुरक्षा तस्वीर उभर रही है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय कार्यकर्ता मोहम्मद दियाब का दावा है कि हमास ने उन इलाकों के 90% से अधिक हिस्से पर दोबारा नियंत्रण स्थापित कर लिया है, जहां उसका प्रभाव पहले से मौजूद था। सड़कों पर फिर से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती दिख रही है, जो अपराध नियंत्रण और कथित विरोधियों पर कार्रवाई कर रही हैं।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ आज वॉशिंगटन में अपनी पहली बैठक करने जा रहा है। करीब 60 देशों को आमंत्रित किया गया है और गाजा के लिए प्रस्तावित शांति योजना पर रिपोर्ट पेश की जानी है। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआती दस्तावेजों में गाजा का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। ट्रम्प का कहना है कि यह बोर्ड केवल गाजा तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक शांति की व्यापक पहल है।
ट्रम्प के नियंत्रण में बोर्ड
चार्टर के अनुसार, ट्रम्प को इस बोर्ड का प्रथम अध्यक्ष नामित किया गया है और उनके पास व्यापक अधिकार होंगे—वेटो पावर से लेकर एजेंडा तय करने और सदस्यों की नियुक्ति तक। यह पद उनके राष्ट्रपति कार्यकाल से स्वतंत्र माना गया है, जिससे आलोचकों ने इसे ‘व्यक्तिगत नियंत्रण वाली संस्था’ करार दिया है। कई यूरोपीय देशों और जी-7 के कुछ सदस्यों ने इसी आधार पर दूरी बनाई है।
किन देशों ने हामी भरी?
जर्मन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 27 देशों ने भागीदारी की सहमति दी है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर माइली और हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन जैसे नेता समर्थन में दिखे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के शामिल होने की भी पुष्टि हुई है। वहीं इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu स्वयं बैठक में नहीं आ रहे, उनकी जगह विदेश मंत्री भाग लेंगे।
गाजा के लिए 5 बिलियन डॉलर का वादा
ट्रम्प ने दावा किया है कि सदस्य देश गाजा में मानवीय राहत और पुनर्निर्माण के लिए 5 बिलियन डॉलर से अधिक की प्रतिबद्धता जताएंगे। साथ ही ‘इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स’ (ISF) की तैनाती का प्रस्ताव है, जो सीमाओं की सुरक्षा और हथियारों के नष्टिकरण की जिम्मेदारी संभालेगी। हालांकि अब तक केवल इंडोनेशिया ने सार्वजनिक रूप से लगभग 2,000 सैनिक भेजने की बात कही है।
हमास और इजराइल आमने-सामने
हमास का कहना है कि जब तक इजराइली सेना पूरी तरह गाजा से नहीं हटती, वह हथियार नहीं डालेगा। वहीं इजराइल की ओर से साफ संकेत हैं कि जब तक हमास पूरी तरह निरस्त्र नहीं होता, सेना की वापसी संभव नहीं। इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) का आरोप है कि संघर्षविराम के दौरान हमास पुनर्गठन कर रहा है।
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्धविराम के बाद भी सैकड़ों फलस्तीनी मारे गए हैं, जबकि इजराइल का दावा है कि हमास की ओर से हमले जारी हैं। यह परिदृश्य दिखाता है कि कागजी संघर्षविराम के बावजूद जमीनी हालात जटिल बने हुए हैं।
निष्कर्ष
गाजा में हमास की पुनर्सक्रियता और वॉशिंगटन में ट्रम्प के ‘पीस बोर्ड’ की बैठक एक ही समय पर हो रही है, लेकिन दोनों की दिशा और प्राथमिकताएं अलग नजर आ रही हैं। जहां एक ओर जमीन पर सत्ता संतुलन बदलता दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक मंच पर शांति की नई रूपरेखा गढ़ने की कोशिश हो रही है। अब देखना यह है कि ये पहल जमीनी हकीकत में कितना बदलाव ला पाती है।