वैश्विक संकेतों और बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव के बीच कीमती धातुओं में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसका सीधा असर निवेशकों से लेकर शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने वाले आम लोगों तक पर पड़ रहा है। हाजिर बाजार में आज सोना और चांदी दोनों ही तेजी के साथ कारोबार करते नजर आए, जिससे सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ गई है।
ताजा कारोबार में चांदी ने तेज उछाल लेते हुए ₹1,560 की मजबूती के साथ ₹2,44,000 प्रति किलो का स्तर छू लिया। वहीं सोना भी बढ़त के साथ ₹1,55,000 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा। लगातार बदलते रुझानों ने खरीदारों को असमंजस में डाल दिया है—अभी खरीदें या थोड़ी गिरावट का इंतजार करें?
राजधानी के सर्राफा बाजार में भाव और भी ऊंचे स्तर पर दर्ज किए गए। यहां सोना लगभग ₹1,58,000 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,60,000 प्रति किलो तक पहुंच गई। दूसरी ओर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कीमतें कुछ नरम रहीं, जहां सोना करीब ₹1,54,700 प्रति 10 ग्राम और चांदी लगभग ₹2,41,400 प्रति किलो के आसपास बनी रही। हाजिर बाजार और वायदा बाजार के बीच यह अंतर निवेशकों के लिए रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की तुलना में चांदी में उतार-चढ़ाव अधिक तेज है। एमसीएक्स पर चांदी पहले ₹4,20,000 प्रति किलो की ऐतिहासिक ऊंचाई तक पहुंच चुकी है, लेकिन वहां से तेज गिरावट भी दर्ज की गई थी। यही अस्थिरता इसे हाई-रिस्क और हाई-रिटर्न की श्रेणी में रखती है।
बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, इंडस्ट्रियल डिमांड में बदलाव और निवेशकों की भावनाएं कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। हालांकि दीर्घकालिक नजरिए से देखने वाले निवेशक मौजूदा गिरावट या उतार-चढ़ाव को खरीदारी का अवसर मान सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं ने मजबूती दिखाई। कॉमेक्स ट्रेड में सोना शुरुआती कमजोरी के बाद 4,996 डॉलर से बढ़कर 5,018.20 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जो लगभग 0.43% की तेजी को दर्शाता है। वहीं स्पॉट सिल्वर 0.67% की बढ़त के साथ 78.15 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-ईरान वार्ता में ठोस प्रगति न होने से निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश यानी सेफ-हेवन एसेट्स की ओर बढ़ा है। यही वजह है कि सोना और चांदी को समर्थन मिल रहा है। इसके साथ ही एशियाई बाजारों में लूनर न्यू ईयर के दौरान कम तरलता और तकनीकी संकेतकों के प्रभाव ने भी कीमतों में कंसोलिडेशन और अस्थिरता को बढ़ावा दिया।
कुल मिलाकर, कीमती धातुओं का बाजार फिलहाल संवेदनशील मोड़ पर खड़ा है। वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक संकेत आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा तय करेंगे। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी के बजाय रणनीतिक और सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जा रही है।